सीबीएसई के दसवीं कक्षा के नतीजों में उत्तर भारत में हिमाचल दूसरे स्थान पर,दसवीं कक्षा के 97.78 फीसदी विद्यार्थी हुए पास
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दसवीं कक्षा के नतीजों में उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। बुधवार को घोषित परीक्षा परिणाम में प्रदेश की बेटियां अव्वल रही हैं। छात्रों के मुकाबले छात्राओं की पास प्रतिशतता अधिक रही है
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 16-04-2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दसवीं कक्षा के नतीजों में उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। बुधवार को घोषित परीक्षा परिणाम में प्रदेश की बेटियां अव्वल रही हैं। छात्रों के मुकाबले छात्राओं की पास प्रतिशतता अधिक रही है। प्रदेश में दसवीं कक्षा के 97.78 फीसदी विद्यार्थी पास हुए हैं। हिमाचल के विद्यार्थियों का प्रदर्शन पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ से बेहतर रहा है।
हिमाचल से अधिक सिर्फ जम्मू-कश्मीर का परिणाम 99.15 फीसदी रहा। हिमाचल में बीते साल परीक्षा परिणाम 97.26 फीसदी रहा था। इस बार 0.52 फीसदी अधिक रहा। प्रदेश में कुल 17,734 विद्यार्थियों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण करवाया था। इनमें 9,825 छात्र और 7,909 छात्राएं रहीं, जिनमें से 17,709 विद्यार्थी उपस्थित हुए। इनमें 9,813 छात्र और 7896 छात्राएं शामिल रहीं।
कुल पास हुए 17,316 विद्यार्थियों में 9,593 छात्र और 7,773 छात्राएं रहीं। दसवीं कक्षा का कुल परिणाम 97.78 फीसदी रहा। छात्राओं का 98.44 फीसदी और छात्रों का 97.30 फीसदी रहा। चंडीगढ़ का 92.51 फीसदी, दिल्ली का 97.21, पंजाब का 96.06, उत्तर प्रदेश का 89.35, उत्तराखंड का 93.26 और हरियाणा का परीक्षा परिणाम 92.28 फीसदी रहा।
प्रदेश के जवाहर नवोदय विद्यालयों सौ फीसदी रहा, केंद्रीय विद्यालयों का 99.83 और निजी स्कूलों का परीक्षा परिणाम 97.49 फीसदी रहा। सीबीसीई के 10वीं के परीक्षा परिणाम में हिमाचल के स्कूलों के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया। डीएवी सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल बरमाणा के नवदीप प्रजापत ने 99.6 प्रतिशत अंक लेकर स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
नवदीप नौवीं से डीएवी बरमाणा में पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले उनका परिवार राजस्थान में रहता था, जहां उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता ललित कुमार एसीसी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता सुमन प्रजापत गृहिणी हैं। नवदीप ने बताया कि परिवार का सहयोग और मार्गदर्शन उनकी सफलता में अहम रहा। उन्होंने बताया कि स्कूल समय के अलावा वह रोजाना 2 से 3 घंटे की सेल्फ स्टडी करते हैं।
हालांकि यह समय सीमित था, लेकिन उन्होंने इसे पूरी एकाग्रता और योजना के साथ उपयोग किया। लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय वह एक-एक घंटे के अंतराल में छोटे ब्रेक लेते थे, जिससे मानसिक थकान नहीं होती थी और पढ़ाई में रुचि बनी रहती थी। कभी-कभी दोस्तों के साथ थोड़ी देर बाहर घूमना भी उनके रूटीन का हिस्सा था, जिससे उनका मन तरोताजा रहता था।
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