ब्लू इकोनॉमी ने बदली तस्वीर , मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना बनी विकास , आजीविका और पर्यावरण पुनर्जीवन की धुरी

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पहाड़ी इलाकों की बंजर ज़मीन आज समृद्धि की नई दास्तान लिख रही है। इस बदलाव के केंद्र में है राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना । इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देते हुए ऊना को ‘ब्लू इकोनॉमी’ का ऐसा उल्लेखनीय मॉडल प्रदान किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। महज एक वर्ष में बंगाणा और श्री चिंतपूर्णी क्षेत्र में जिस तेज़ी से परिवर्तन आया है

Nov 28, 2025 - 18:09
Nov 28, 2025 - 18:13
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ब्लू इकोनॉमी ने बदली तस्वीर , मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना बनी विकास , आजीविका और पर्यावरण पुनर्जीवन की धुरी
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यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना  28-11-2025
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पहाड़ी इलाकों की बंजर ज़मीन आज समृद्धि की नई दास्तान लिख रही है। इस बदलाव के केंद्र में है राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना । इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देते हुए ऊना को ‘ब्लू इकोनॉमी’ का ऐसा उल्लेखनीय मॉडल प्रदान किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। महज एक वर्ष में बंगाणा और श्री चिंतपूर्णी क्षेत्र में जिस तेज़ी से परिवर्तन आया है, वह न सिर्फ़ सराहनीय है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। बता दें, प्रदेश के मत्स्य पालन विभाग  द्वारा क्रियान्वित की जा रही इस योजना में किसानों को कार्प मत्स्य पालन के तालाब निर्माण के लिए इकाई लागत पर 80 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। 
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा साल 2024 में आरंभ की गई इस योजना का लक्ष्य राज्य की मछली पालन क्षमता को बढ़ावा देने के साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। मत्स्य पालन विभाग ऊना के सहायक निदेशक विवेक कुमार बताते हैं कि बंगाणा और श्री चिंतपूर्णी में कई जगह भूमि पथरीली, कठोर और खेती के लिए लगभग अनुपयोगी थी। जंगली जानवरों का जोखिम किसानों को और पीछे धकेल देता था। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना ने किसानों को एक मजबूत विकल्प उपलब्ध कराया। केवल एक साल के भीतर आज वही भूमि उच्च मूल्य वाले मत्स्य उत्पादन केंद्रों में बदल चुकी है। अब तक 2.8 हेक्टेयर भूमि इस योजना में कवर की जा चुकी है। 10 किसानों को लगभग 28 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है। 
इनमें से 2.12 हेक्टेयर भूमि बंगाणा और चिंतपूर्णी क्षेत्र में है, जिन्हें 21.03 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। अब तक 10 तालाब सफलतापूर्वक निर्मित हो चुके हैं, जो उत्पादन, आय और रोजगार के स्थायी स्रोत बन रहे हैं। मत्स्य पालन विभाग के निदेशक विवेक चंदेल का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की प्राथमिकता पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित आर्थिक गतिविधियों को मज़बूत करना है। मुख्यमंत्री की इस सोच को जमीन पर लाने में मत्स्य पालन विभाग अपने स्तर पर लगातार प्रयासरत है। इसमें सरकार की मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना बेहद महत्वपूर्ण पहल है। पहाड़ी इलाकों में तालाब निर्माण सामान्य स्थानों की तुलना में कहीं अधिक महंगा होता है, इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। विवेक चंदेल बताते हैं कि यह योजना सिर्फ आर्थिक वृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण सुधार का भी प्रभावी हथियार बनकर उभरी है। 
वर्षा आधारित तालाब प्राकृतिक जल रिचार्ज संरचना की तरह काम कर रहे हैं। भूजल स्तर में सुधार ला रहे हैं। आसपास के पर्यावरण को अधिक संतुलित बना रहे हैं। किसानों की आय में आई स्थिर वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक टिकाऊ आधार दिया है। उपायुक्त जतिन लाल का कहना है कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जनता के जीवन में ठोस और सकारात्मक बदलाव लाना है। मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का विशेष तौर पर इस बात पर ध्यान है कि स्वरोजगार आधारित अवसर हर नागरिक के द्वार तक पहुंचें। प्रशासन की प्रतिबद्धता है कि पात्र किसानों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले, जिससे जिले में आय, रोजगार और संसाधन प्रबंधन के नए आयाम विकसित हों।

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