भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में प्राचीन लिपियों एवं पाण्डुलिपियों के संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में “पश्चिमी हिमालय के अंतर्गत प्राचीन लेखनकला की धरोहर हिमाचल की लिपियाँ एवं पाण्डुलिपियों का संरक्षण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 21–22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें प्राचीन लिपियों, पांडुलिपियों के संरक्षण, पठन-पाठन, डिजिटलीकरण एवं प्रलेखन से संबंधित विभिन्न आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा
यंगवार्ता न्यूज़ सोलन 22-04-2026
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में “पश्चिमी हिमालय के अंतर्गत प्राचीन लेखनकला की धरोहर हिमाचल की लिपियाँ एवं पाण्डुलिपियों का संरक्षण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 21–22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें प्राचीन लिपियों, पांडुलिपियों के संरक्षण, पठन-पाठन, डिजिटलीकरण एवं प्रलेखन से संबंधित विभिन्न आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य पश्चिमी हिमालय क्षेत्र, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में प्रचलित शारदा से विकसित पाबुची, टाकरी, पण्डवाणी एवं चंदवाणी जैसी लिपियों तथा उनसे संबंधित पाण्डुलिपि परंपरा के संरक्षण एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।
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