शिमला नगर निगम के नियमों की धज्जियां उड़ाने के साथ महिलाओं के हक भी छीन रही सुक्खू सरकार : जयराम ठाकुर 

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नगर निगम शिमला में घटित हालिया सियासी घटनाक्रम और प्रशासनिक उथल-पुथल को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर हमला बोला है। मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी 'मित्र मंडली' को उपकृत करने के मोह में लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं

Mar 3, 2026 - 19:12
Mar 3, 2026 - 19:35
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शिमला नगर निगम के नियमों की धज्जियां उड़ाने के साथ महिलाओं के हक भी छीन रही सुक्खू सरकार : जयराम ठाकुर 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  03-03-2026
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नगर निगम शिमला में घटित हालिया सियासी घटनाक्रम और प्रशासनिक उथल-पुथल को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर हमला बोला है। मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी 'मित्र मंडली' को उपकृत करने के मोह में लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला नगर निगम में जो कुछ भी घटित हो रहा है , वह न केवल अलोकतांत्रिक है बल्कि सीधे तौर पर जनमत का अपमान है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अपने एक खास मित्र को लंबे समय तक सत्ता के गलियारों में एडजस्ट करने और उन्हें सत्ता सुख दिलाने की खातिर मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहले तो लोकतांत्रिक ढांचे का गला घोंटते हुए संविधान की धज्जियां उड़ाई और अब मनमाने ढंग से नगर निगम की कार्यवाही को संचालित कर रहे हैं। 
भाजपा पार्षदों को जिस अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से सदन से बाहर निकाला गया, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार विपक्ष की तार्किक आवाज और जनता के सवालों से भयभीत है। नेता प्रतिपक्ष ने इस कदम को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देते हुए कहा किया कि भारतीय जनता पार्टी इस प्रकार की दमनकारी नीतियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके खिलाफ सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करते हुए कांग्रेस सरकार को 'महिला विरोधी मानसिकता' वाली सरकार बताया। उन्होंने एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि स्थापित नियमों और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार, शिमला नगर निगम में मेयर का पद अढ़ाई साल के कार्यकाल के बाद महिला के लिए अवसर बनना था लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने प्रिय मित्र की कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए नियमों की बलि चढ़ा दी। यह कदम न केवल नियमों में बदलाव है, बल्कि उन तमाम पात्र महिला पार्षदों के अधिकारों पर डकैती है जो मेयर पद की गरिमा संभालने की योग्यता रखती थीं। मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और मित्रता के चलते मातृशक्ति के सम्मान को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है, जो कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के खोखले दावों की पोल खोलता है। 
उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस मंचों से महिला सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वह महिलाओं के सम्मान के हर मुद्दे पर मौन हो जाती है। महिला सम्मान निधि के नाम पर झूठी गारंटी के नाम आर वोट लेकर बाद में देश भर में जाकर सम्मान निधि देने का झूठ भी बोलते हैं। इसी तरह मित्र को लाभ पहुँचाने के लिए एक महिला के संवैधानिक अधिकार को छीना गया। ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू आज अपनी 'मित्र मंडली' के ऐसे घेरे में कैद हो चुके हैं कि उन्हें उचित-अनुचित और सही-गलत का बोध तक नहीं रहा है। सरकार जनहित के बजाय 'मित्र हित' को सर्वोपरि मान रही है, जिसके कारण पूरा प्रशासन ठप पड़ा है।
 भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आज शिमला नगर निगम भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है, जहां विकास कार्यों के नाम पर धांधली हो रही है और जब भाजपा के निर्वाचित पार्षद इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें सत्ता के रसूख और दवाब का इस्तेमाल कर खामोश करने की कोशिश की जा रही है। पार्षदों को सदन से बाहर निकालना लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय है, क्योंकि सदन चर्चा और असहमति के सम्मान के लिए होता है, न कि विरोधियों की आवाज कुचलने के लिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता के मद में चूर होकर यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता सब देख रही है और सरकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ किए गए इस खिलवाड़ की कीमत  चुकानी पड़ेगी।

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