सिरमौर में टूटा कांग्रेस का तिलिस्म, उद्योग मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सीएम के करीबी विधायक भी नहीं बचा पाए साख
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनाव के परिणाम अब आ गए हैं। जहां हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में से भाजपा ने तीन पर कब्जा किया है। वहीं जिला परिषद और बीडीसी में भी कांग्रेस की बुरी दुर्गति हुई है। यदि बात जिला सिरमौर की करें तो जिला सिरमौर में कांग्रेस चारों खाने चित हो गई है।
रमेश पहाड़िया - नाहन 01 जून, 2026 :
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनाव के परिणाम अब आ गए हैं। जहां हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में से भाजपा ने तीन पर कब्जा किया है। वहीं जिला परिषद और बीडीसी में भी कांग्रेस की बुरी दुर्गति हुई है। यदि बात जिला सिरमौर की करें तो जिला सिरमौर में कांग्रेस चारों खाने चित हो गई है। आलम यह है कि अभी तक घोषित 13 जिला परिषद वार्डों के चुनाव परिणाम में से कांग्रेस के खाते में मात्र दो सीटें ही आई है , जबकि 13 में से 11 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया है।
जानकारी के मुताबिक जिला सिरमौर में इस बार मतदाताओं ने कांग्रेस को चारों खाने चित किया है। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस द्वारा विधानसभा चुनाव में दी गई झूठी गारंटीयों के परिणाम अब आने शुरू हो गए है और अब प्रदेश की जनता कांग्रेस पार्टी से गिन गिन कर बदला ले रही है। यदि जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की बात करते हैं तो गिरिपार क्षेत्र में सबसे अधिक फजीहत कांग्रेस की हाटी क्षेत्र में हुई है।
गौर हो कि वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव से पूर्व जिला सिरमौर के गिरिपार के हाटी क्षेत्र को जनजाति का दर्जा मिला था, लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा इसमें अड़ंगा डालकर जनजाति का मुद्दा कोर्ट में लटका दिया , जिसके चलते क्षेत्र के हजारों युवाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हाटी क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि यदि वर्ष 2022 में ही गिरिपार क्षेत्र को केंद्र सरकार द्वारा दिया गया जनजाति क्षेत्र का दर्जा लागू किया होता तो आज क्षेत्र के हजारों युवा ऊंचे पदों पर कार्यरत होते। वहीं हजारों युवा देश के नामी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे होते हैं।
जानकार बताते हैं हाटी क्षेत्र रेणुका, शिलाई और पच्छाद के राजगढ़ में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है। आलम यह रहा कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी अपनी साख तक नहीं बचा पाए। रेणुका निर्वाचन क्षेत्र की तीनों जिला परिषद की तीनो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को करारी मात दी है। वहीं यदि शिलाई की बात करते हैं तो शिलाई निर्वाचन क्षेत्र की भी तीनों जिला परिषद की सीटें भाजपा ने कांग्रेस की छीनी है। केवल मात्र पांवटा साहिब और शिलाई की संयुक्त सीट सतौन कांग्रेस की झोली में गई है।
आपको बता दें कि जिला सिरमौर में भारतीय जनता पार्टी ने 13 में से 11 सीटों पर विजय हासिल की है। इनमें नोहराधार वार्ड से हंसराज , दाना घाटो से अंकिता ठाकुर , रास्त वार्ड से सुनीता पोजटा , शिलाई वार्ड से इंदु ठाकुर , टटियाना से बलबीर पुंडीर , वनकला वार्ड से अंकित शर्मा , त्रिलोकपुर से प्रमिला देवी , ददाहू वार्ड से शिवानी , सराहा वार्ड से बलदेव भंडारी , लाना भल्टा से लेखराज और नेरी कोटली वार्ड से भारतीय जनता पार्टी समर्थित सरोज वाला विजयी हुई है। कांग्रेस पार्टी की झोली में करगानु से रितु बाला और सतोन से खत्री राम विजयी रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि यह वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का ट्रायल है। बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता पर काबिज होते ही जहां जिला सिरमौर में 100 से अधिक संस्थान बंद किए हैं। वहीं बेरोजगार युवाओं की लंबी फौज खड़ी हो गई है। यही नहीं महिलाओं से किया गया ₹1500 मासिक का वायदा भी कांग्रेस पूरा नहीं कर पाई है , जिसके चलते प्रदेश के लोग कांग्रेस पार्टी से गिन गिन कर बदला ले रहे हैं। बताते हैं कि यदि कांग्रेस पार्टी ने अब भी शर्मनाक हार से सबक नहीं लिया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की इससे भी बुरी दुर्गति हो सकती है। यदि जिला सिरमौर की बात करें तो जिला कांग्रेस का गढ़ माना जाता है , लेकिन पंचायती राज चुनाव में जिला की जनता ने कांग्रेस को जमीन सुंघा दी है। यही नहीं कांग्रेस पार्टी द्वारा अक्सर ढिंढोरा पीटा जाता था कि सरकार द्वारा ईवीएम मार्फत चुनाव करवाए जाते हैं। जिस से धांधली की आशंका रहती है। यदि बैलट पेपर से चुनाव होते तो कांग्रेस पार्टी जीत दर्ज करती , लेकिन पंचायती राज के सभी चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से हुए हैं , जिसके चलते अब निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की यह हसरत भी पूरी कर दी है और बैलेट पेपर से कांग्रेस की बुरी हार हुई है।
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