सड़क नहीं तो वोट नहीं ग्रामीणों ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान, गांव में लगाए पोस्टर

देशभर में चुनावी बिल्कुल बच चुका है और अब राजनेता जनता की दहलीज पर दस्तक देने को तैयार हो गए हैं , लेकिन देवभूमि उत्तरांचल के कुछ क्षेत्र आज भी ऐसे हैं जो विकास से कोसों दूर है। आलम यह है कि उत्तराखंड की ग्राम पंचायत की  किमोली और पारतोली में अभी तक सड़क सुविधा नहीं है।कर्ण प्रयाग के  किमोली और पारतोली में लंबे समय से ग्रामीण सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं , लेकिन राजनेताओं द्वारा उन्हें हर बार आश्वासन ही दिए जाते

Mar 17, 2024 - 19:02
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सड़क नहीं तो वोट नहीं ग्रामीणों ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान, गांव में लगाए पोस्टर

यंगवार्ता न्यूज़ - देहरादून  17-03-2024
देशभर में चुनावी बिल्कुल बच चुका है और अब राजनेता जनता की दहलीज पर दस्तक देने को तैयार हो गए हैं , लेकिन देवभूमि उत्तरांचल के कुछ क्षेत्र आज भी ऐसे हैं जो विकास से कोसों दूर है। आलम यह है कि उत्तराखंड की ग्राम पंचायत की  किमोली और पारतोली में अभी तक सड़क सुविधा नहीं है।कर्ण प्रयाग के  किमोली और पारतोली में लंबे समय से ग्रामीण सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं , लेकिन राजनेताओं द्वारा उन्हें हर बार आश्वासन ही दिए जाते हैं। 
राजनेताओं के आश्वासन से तंग आकर अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला लिया है। इसके लिए बाकायदा ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर वॉल राइटिंग कर किसी भी राजनेता को गांव में प्रवेश न करने की हिदायत दी है। ग्रामीणों ने लिखा है कि सड़क नहीं तो वोट नहीं। लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि  किमोली और पारतोली में कोई भी राजनेता प्रवेश न करें अन्यथा उसके साथ कुछ भी हो सकता है। 
ग्रामीणों ने लिखा है कि लंबे समय से ग्रामीण सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं , लेकिन राजनेताओं द्वारा हर बार उन्हें आश्वासन ही दिए जाते हैं राजनेताओं के आश्वासन से तंग आकर ग्रामीणों ने यह कदम उठाया है। गौर हो कि उत्तराखंड में आगामी 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव होने हैं। इसी बीच कर्णप्रयाग के किमोली और पारतोली के ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। 
ग्रामीणों ने गांव में सड़क नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि जनप्रतिनिधियों को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। दरअसल, ग्रामीण लंबे समय से गांव में सड़क और कई जगहों पर डामरीकरण की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली है। जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है।

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