सी-बकथोर्न बन सकता है लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़, हिमाचल किसान सभा ने की सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने भारत सरकार से राष्ट्रीय हिमालयी सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग उठाई। यह मांग लद्दाख में सी-बकथॉर्न के बढ़ते महत्व को देखते हुए की गई है। किसान सभा का मानना है कि सी-बकथॉर्न लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है और पूरे हिमालयी क्षेत्र के टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास की मजबूत नींव रख सकता है।

Jul 16, 2026 - 21:25
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सी-बकथोर्न बन सकता है लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़, हिमाचल किसान सभा ने की सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग

यंगवार्ता न्यूज शिमला 16 जुलाई, 2026 : 


अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने भारत सरकार से राष्ट्रीय हिमालयी सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग उठाई। यह मांग लद्दाख में सी-बकथॉर्न के बढ़ते महत्व को देखते हुए की गई है। किसान सभा का मानना है कि सी-बकथॉर्न लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है और पूरे हिमालयी क्षेत्र के टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास की मजबूत नींव रख सकता है। सभा ने यह भी कहा कि लद्दाख को राष्ट्रीय सी-बकथॉर्न उत्कृष्टता केन्द्र (National Centre of Excellence) के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड और जम्मू-कश्मीर की सरकारें मिलकर अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और निर्यात को एक साथ जोड़ते हुए एक राष्ट्रीय मिशन शुरू करें। 


अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय किसान समिति के सदस्य और हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने प्रैस को जारी बयान में कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में से एक है। यहां ऊँचाई बहुत ज्यादा है और मौसम बेहद कठिन है। यहां खेती की जमीन कम है और खेती का मौसम भी बहुत छोटा होता है। ऐसे में किसानों और जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के मौके बहुत सीमित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी हालत में सी-बकथॉर्न लद्दाख की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला सबसे अहम प्राकृतिक संसाधन बनकर सामने आया है।


डॉ. तँवर ने कहा कि सी-बकथॉर्न के संरक्षण, संग्रहण, खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन पर सबसे पहला और सबसे बड़ा हक लद्दाख के स्थानीय किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और जनजातीय समुदायों का होना चाहिए। सरकार की हर योजना का सीधा फायदा इन्हीं लोगों तक पहुंचना चाहिए।
अखिल भारतीय किसान सभा ने मांग की कि लद्दाख के हर बड़े इलाके में ग्राम स्तर के संग्रहण केन्द्र, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयाँ, कोल्ड-चेन, गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएँ, पैकेजिंग केन्द्र और मजबूत विपणन ढांचा बनाया जाए, ताकि मूल्य संवर्धन वहीं स्थानीय स्तर पर हो और कमाई बाहरी कंपनियों की बजाय स्थानीय लोगों को मिले। सभा ने किसानों और सहकारी संस्थाओं के लिए खरीद सुनिश्चित करने, उचित दाम, आसान संस्थागत ऋण, फसल बीमा, वित्तीय मदद, उद्यमिता विकास, कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकी सहयोग देने की भी मांग की।


अखिल भारतीय किसान सभा ने भारत सरकार से मांग की है कि वह सी-बकथॉर्न को जनजातीय विकास, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन, जैव विविधता संरक्षण, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के तहत "रणनीतिक हिमालयी फसल" घोषित करे। साथ ही आईसीएआर, सीएसआईआर, विश्वविद्यालयों और दूसरे वैज्ञानिक संस्थानों को बेहतर किस्मों, वैज्ञानिक खेती, यंत्रीकृत तुड़ाई, प्रसंस्करण तकनीक और उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर मिलकर काम करने के लिए बढ़ावा दिया जाए।


किसान सभा ने केन्द्र को यह भी सुझाव दिया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (लाहौल-स्पीति और किन्नौर), उत्तराखण्ड और जम्मू-कश्मीर के बीच अनुसंधान, पौध सामग्री, किसान प्रशिक्षण, प्रसंस्करण तकनीक और सहकारी विपणन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग बनाया जाए, ताकि पूरे हिमालयी क्षेत्र को इसका फायदा मिल सके।


डॉ. तँवर ने कहा कि "सी-बकथॉर्न सिर्फ एक औषधीय पौधा या व्यावसायिक फसल नहीं है, बल्कि हिमालयी विकास का एक पूरा मॉडल है। यह गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगा, रोजगार के बड़े मौके बनाएगा, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा, नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा करेगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि एक समर्पित राष्ट्रीय हिमालयी सी-बकथॉर्न मिशन लद्दाख को भारत की 'सी-बकथॉर्न राजधानी' बना सकता है और पूरे हिमालयी क्षेत्र में स्थायी आजीविका का नया रास्ता खोल सकता है।"

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