प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी अपने कनिष्ठ से कम वेतन पाने का पात्र नहीं
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी अपने कनिष्ठ से कम वेतन पाने का पात्र नहीं है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने सरकार को आदेश दिए
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 04-04-2026
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी अपने कनिष्ठ से कम वेतन पाने का पात्र नहीं है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने सरकार को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को उनके जूनियर के समान वेतनमान (स्टेप-अप पे) प्रदान किया जाए। कोर्ट ने कहा कि भले ही जूनियर पहले प्रमोट हो गए हों, लेकिन जब सीनियर भी उसी कैडर में प्रमोट होकर आ जाता है, तो वह अपनी वरिष्ठता वापस पा लेता है।
कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि एक वरिष्ठ अधिकारी को उसके कनिष्ठ से कम वेतन नहीं दिया जा सकता। यदि ऐसी विसंगति आती है, तो सरकार को वरिष्ठ का वेतन बढ़ाकर जूनियर के बराबर करना चाहिए। अदालत ने फंडामेंटल रूल्स (एफआर 22)और विभाग के पुराने आदेश 16 मार्च 2012 को जारी याचिकाकर्ता के दावे को खारिज करने वाले आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया।
सरकार को निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता का वेतन उनके जूनियर्स के समान तय किया जाए। याचिकाकर्ता को यह लाभ काल्पनिक आधार पर और याचिका दायर करने से तीन साल पहले से वास्तविक आधार पर दिया जाए। यदि तीन महीने के भीतर एरियर का भुगतान नहीं किया जाता है, तो विभाग को इस पर 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। याचिकाकर्ता 1961 में वन परिक्षेत्राधिकारी के रूप में भर्ती हुए थे।
वरिष्ठता सूची में वह अपने सहकर्मियों से काफी ऊपर थे। हालांकि, आरक्षित श्रेणी से संबंधित होने के कारण उनके जूनियर को 1979 में ही एडहॉक आधार पर प्रमोट कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता की पदोन्नति 1982 में हुई।
पदोन्नति के बाद 1 जनवरी 1996 से एक ऐसी स्थिति पैदा हुई, जहां जूनियर कर्मचारी जो पहले प्रमोट हो गए थे, अपने सीनियर से अधिक वेतन लेने लगे। विभाग ने याचिकाकर्ता की स्टेप-अप (वेतन वृद्धि) की मांग को यह कहकर खारिज कर दिया था कि जूनियर्स ने उच्च पद पर 16 साल की सेवा पहले पूरी कर ली थी।
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