भाजपा में शामिल हुए 6 पूर्व विधायकों को बड़ी राहत,हाईकोर्ट ने विधायकों को विधानसभा से मिलने वाली पेंशन जारी करने के दिए आदेश
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए 6 पूर्व विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अयोग्य घोषित किए गए इन बागी विधायकों को विधानसभा से मिलने वाली पेंशन जारी करने के आदेश दिए
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 10-04-2026
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए 6 पूर्व विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अयोग्य घोषित किए गए इन बागी विधायकों को विधानसभा से मिलने वाली पेंशन जारी करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए कि पात्र याचिकाकर्ताओं की बकाया और नियमित पेंशन एक माह के भीतर जारी की जाए।
आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दिए।
कोर्ट में राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई थी, जिनमें पेंशन जारी करने की मांग की गई थी। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद से ये बागी विधायक पेंशन से वंचित थे। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद भाजपा ने सुक्खू सरकार पर जुबानी हमला किया है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुक्खू सरकार की राजनीति 'समान दृष्टि' नहीं बल्कि 'बदले की भावना' पर आधारित है। भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झूठ गढ़ने, विपक्ष को निशाना बनाने और विरोध करने वाले नेताओं को परेशान करने की नीति अपनाई, लेकिन अब न्यायालय के फैसले ने उनके इस एजेंडे पर सीधा प्रहार किया है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 07.04.2026 में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक की प्रभावशीलता पूर्व प्रभाव नहीं हो सकती और यह केवल भविष्य के लिए ही लागू होगा। न्यायालय ने साफ निर्देश दिए कि संबंधित पूर्व विधायकों को उनकी पेंशन एवं बकाया राशि एक माह के भीतर जारी की जाए, अन्यथा राज्य को 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा यह फैसला सुक्खू सरकार के चेहरे पर तमाचा है। कांग्रेस ने कानून को बदले का हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि कानून किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि भविष्य के लिए बनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया 2024 का संशोधन बिल, जिसमें अयोग्य घोषित विधायकों (10वीं अनुसूची) की पेंशन रोकने का प्रयास किया गया, पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था। लेकिन सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे वह बिल वापस लेना पड़ा। इसके बाद 2026 में नया संशोधन लाया गया, जिसकी सीमा केवल 14वीं विधानसभा के बाद के विधायकों तक सीमित रखी गई—यह स्वयं साबित करता है कि पहले किया गया कदम गलत और असंवैधानिक था।
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