प्रदेश की राजधानी में 30 मार्च को हिमाचल पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति का होगा विशाल धरना प्रदर्शन
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पेंशनरों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से पेश बजट को दिशाहीन, विकासहीन और पेंशनर्स विरोधी करार दिया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 23-03-2026
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पेंशनरों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से पेश बजट को दिशाहीन, विकासहीन और पेंशनर्स विरोधी करार दिया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि बजट में 4000 करोड़ रुपये की कटौती सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का प्रमाण है।
पेंशनरों का कहना है कि इसमें पेंशनरों की लंबित देनदारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। बजट में लंबित देनदारियों का कोई प्रावधान न होने के चलते पेंशनरों ने फैसला किया है कि इसके खिलाफ 30 मार्च को शिमला में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। पेंशनर नेताओं ने कहा कि इस प्रदर्शन में पेंशनरों के 18 संगठन शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और छुट्टी नगदीकरण जैसे वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे हैं, जबकि जनवरी 2022 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ नहीं मिल रहे हैं।
बजट में 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता, 44 महीने के बकाया एरियर और लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। केवल क्लास-4 कर्मचारियों के बकाया का जिक्र किया गया है, लेकिन उसकी अदायगी कब होगी, यह स्पष्ट नहीं है। समिति का कहना है कि 5 मार्च को सुंदरनगर में पेंशनरों की राज्य कार्यकारिणी की बैठक हुई थी।
इसमें पेंशनरों ने तय किया था कि सरकार यदि बजट में लंबित देनदारियों की घोषण नहीं करती तो पेंशनर 30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन करेगी। इसके लिए प्रदेशभर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पेंशनरों ने सरकार से मांग की है कि लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान, महंगाई भत्ते की किश्तें, एरियर और मेडिकल बिलों के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया जाए।
हिमाचल पथ परिवहन के पेंशनरों को 70 साल की उम्र पूरी करने वालों को एरियर, मंहगाई भते की 3% की किश्त और संशोधित बेतनमान का 50,000 रुपये की पहली किश्त की अदायगी तुरंत की जाए। वहीं बिजली बोर्ड में ओपीएस बहाल की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशनरों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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