सांसद त्रिवेन्द्र के प्रयासों से के.वि आईडीपीएल हेतु 2.41 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी

हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ऋषिकेश स्थित केंद्रीय विद्यालय, आईडीपीएल के लिए 2.41 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र सरकार द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की

Apr 17, 2026 - 13:15
Apr 17, 2026 - 13:17
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सांसद त्रिवेन्द्र के प्रयासों से के.वि आईडीपीएल हेतु 2.41 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी
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सनी वर्मा - हरिद्वार   17-04-2026

हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ऋषिकेश स्थित केंद्रीय विद्यालय, आईडीपीएल के लिए 2.41 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र सरकार द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय विद्यालय आईडीपीएल, ऋषिकेश के पुनर्निर्माण हेतु विद्यालय की भूमि के हस्तांतरण का विषय अनेक वर्षों से लंबित था। 

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि इस वर्ष केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा भूमि हस्तांतरण के अभाव में नए सत्र में प्रवेश पर रोक भी लगा दी गई थी, जिससे विद्यालय के बंद होने का संकट उत्पन्न हो गया था। इससे क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।

सांसद रावत ने कहा कि जैसे ही स्थानीय जनता ने इस विषय को उनके संज्ञान में लाया, उन्होंने तत्काल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। दोनों मंत्रालयों के साथ निरंतर समन्वय एवं अनुवर्ती प्रयासों के परिणामस्वरूप पर्यावरण मंत्रालय ने के.वि. आईडीपीएल के लिए लगभग 2.41 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।

उन्होंने कहा कि इस सकारात्मक निर्णय से न केवल विद्यालय के बंद होने का संकट टल गया है, बल्कि अब केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जा सकेगी। साथ ही विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण कार्य को भी शीघ्र गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्थायी एवं बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

सांसद ने यह भी बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय कार्यकर्ताओं, विद्यालय प्राचार्य, पर्यावरण मंत्रालय की टीम एवं उत्तराखंड वन विभाग के साथ निरंतर समन्वय बना रहा, जिसके चलते वर्षों से लंबित समस्या का समाधान संभव हो पाया। रावत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा यह स्वीकृति वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत दी गई है। 

जिसमें पर्यावरण संरक्षण, क्षतिपूर्ति वनरोपण, एनपीवी भुगतान एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सभी आवश्यक शर्तों को शामिल किया गया है। उन्होंने इसे विकास और पर्यावरण संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

सांसद रावत ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों की आवश्यकताओं को समझते हुए त्वरित एवं संवेदनशील निर्णय लिए जा रहे हैं। 

मोदी सरकार के प्रत्येक मंत्रालय में जब भी वे स्थानीय समस्याओं को लेकर जाते हैं, संबंधित मंत्रीगण यथासंभव समाधान सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के निर्णय उत्तराखंड के समग्र विकास को नई दिशा देंगे और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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