डीएवीएन पब्लिक स्कूल ददाहू में महाराणा प्रताप जयंती पर विषेष कार्यक्रम का आयोजन 

डीएवीएन पब्लिक स्कूल ददाहू में महाराणा प्रताप जयंती पर विषेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराणा प्रताप को याद करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य धनेन्द्र गोयल ने कहा कि भारत वर्ष वींरो की मातृभूमि हैं वीरता

May 28, 2025 - 15:21
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डीएवीएन पब्लिक स्कूल ददाहू में महाराणा प्रताप जयंती पर विषेष कार्यक्रम का आयोजन 
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यंगवार्ता न्यूज़ - ददाहू    28-05-2025

डीएवीएन पब्लिक स्कूल ददाहू में महाराणा प्रताप जयंती पर विषेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराणा प्रताप को याद करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य धनेन्द्र गोयल ने कहा कि भारत वर्ष वींरो की मातृभूमि हैं वीरता और षौर्य के विषय में जब बात की जाती हैं तो भारतवर्ष में अनेक ऐसे महावीर हैं। 

जिन्होने इस मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया परन्तु इस मातृभूमि के मान-सम्मान पर आंच नहीं आने दी। ऐसे ही वीरों में वीर षिरामणि महाराणा प्रताप का नाम आता हैं जिन्होनें जीवन भर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया। वीर षिरामणि महाराणा प्रताप का का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ किले में हुआ जो वर्तमान में राजस्थान जिले में स्थित है। 

महाराणा प्रताप के पिता का नाम महाराणा उदय सिंह जों कि मेवाड पर राज करते थे और चितौढ इनकी राजधानी थी और माता का नाम जींवत कंवर था। महाराणा प्रताप की वीरता और षक्ति के बारे में बताते हुए धनेन्द्र गोयल ने कहा कि महाराणा प्रताप एक अदभुत व्यक्तित्व के स्वामी थे उनका कद 7 फुट 5 इंच था। 

यह अपने साथ 81 किलो का भाला और कुल मिलाकर 208 किलो का वजन लेकर रणभूमि में जब उतरते थे तो दुष्मन कांप उठता था। महाराणा प्रताप ने बहलोल खान को घोडे सहित दो टुकडों में काट दिया था। उनकी वीरता का डंका इस कदर था कि कभी मुगल अकबर युद्व के लिए उनके सामने नहीं आया। महाराणा प्रताप के वफादार घोडे का नाम चेतक था जोकि कठियावाडी नस्ल का था। 
                                 
विद्यालय के प्रधानाचार्य धनेन्द्र गोयल ने बताया के विद्यालय में सभी दिवस व अवसर हर्ष और उल्लास के साथ मनाये जाते हैं इसका मुख्य उद्येष्य विद्यार्थियों को उनके गौरवमयी इतिहास के बारे में जानकारी प्रदान करना हैं। ताकि विद्यार्थी अपनी मातृभूमि से प्रेम करे और उनको पता चले कि इस मातृभूमि की रक्षा के लिए ऐसे -ऐसे वीर भी थे। 

जिन्होनें अपना सर्वोच बलिदान दिया परन्तु अपनी मातृभूमि पर आंच नही आने दी। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य धनेन्द्र गोयल, समस्त विद्यार्थी और विद्यालय का समस्त स्टाॅफ उपस्थित था।

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