सीएम सुक्खू की अगुवाई में प्राकृतिक खेती के अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा हिमाचल

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और प्राकृतिक खेती को सशक्त रूप से बढ़ावा देने के अपने संकल्प को धरातल पर उतार रही

May 23, 2025 - 20:12
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सीएम सुक्खू की अगुवाई में प्राकृतिक खेती के अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा हिमाचल
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ऊना जिले की टकारला और रामपुर अनाज मंडियों में 41 किसानों ने बेची 425.818 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं

26.40 लाख की हुई कुल खरीद, राशि डीबीटी से पहुंचेगी किसानों के बैंक खातों में : वीरेंद्र बग्गा

यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना   23-05-2025

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और प्राकृतिक खेती को सशक्त रूप से बढ़ावा देने के अपने संकल्प को धरातल पर उतार रही है। इसी कड़ी में जिला ऊना की टकारला और रामपुर अनाज मंडियों में प्राकृतिक विधि से उत्पादित गेहूं की खरीद प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मंडियों में कुल 41 किसानों से 425.818 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद की गई है, जिसकी कुल कीमत 26,40,071 रुपये निर्धारित हुई है। यह राशि शीघ्र ही डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

आत्मा परियोजना, ऊना के परियोजना निदेशक वीरेंद्र बग्गा ने बताया कि रामपुर मंडी में 17 किसानों से 193.14 क्विंटल एवं टकारला मंडी में 24 किसानों से 232.678 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य और 2 रुपये प्रति किलो का परिवहन शुल्क भी दिया जा रहा है। 

इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने गेहूं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन शुल्क देने की पहल की है। बग्गा ने आगे बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू  की दूरदर्शी नीतियों के बल से वर्तमान में जिला ऊना में लगभग 16 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और करीब 2 हजार हेक्टेयर भूमि पर रसायन मुक्त खेती कर रहे हैं। 

किसान वर्तमान में पांच किस्मों की गेहूं का उत्पादन प्राकृतिक विधि से कर रहे हैं, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहते हैं। साथ ही लागत में कमी और लाभ में वृद्धि के कारण किसानों की आर्थिकी को नया बल मिल रहा है।

गौरतलब है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को इसका अच्छा दाम प्रदान को लेकर हिमाचल सरकार की इस सक्रिय भूमिका से न केवल इस खेती से जुड़े किसान बेहद उत्साहित और संतुष्ट हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी इस दिशा में जुड़ने के लिए प्रेरणा मिली है।  


 

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