सचिवालय के बाहर मांगों को लेकर फिर सड़कों पर उतरे दृष्टिबाधित, किया चक्का जाम
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत दृष्टिहीन संघ ने सचिवालय के समीप जोरदार प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को चक्का जाम किया है। संघ पिछले 976 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहा है।
यंगवार्ता न्यूज शिमला 16 जून, 2026 :
दृष्टिहीन संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोला और बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि उनकी जायज मांगों से जुड़ी फाइल पिछले 136 दिनों से मुख्यमंत्री सुखविंदर के पास लंबित है, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। ठाकुर ने सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके लिए कुछ नहीं कर सकते और उनके अधिकारों को छीनना ही सरकार की नीति है, तो मुख्यमंत्री खुद ग्राउंड जीरो पर आएं और अपने हाथों से उन्हें जहर की पुड़िया थमा दें ताकि वे इस रोज-रोज के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्त हो सकें। उन्होंने प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि वे अब किसी भी मंत्री, सचिव या विभागीय अधिकारी के साथ किसी तरह की वार्ता या समझौता बैठक नहीं करेंगे। संघ अब केवल और केवल मुख्यमंत्री से ही सीधे बात करेगा और जब तक मुख्यमंत्री खुद आकर उनसे मुलाकात नहीं करते।
राजेश ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1995 से लंबित पड़े दिव्यांगों और दृष्टिहीनों के बैकलॉग पदों, खासकर क्लास-4 की श्रेणियों को तुरंत विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरा जाए। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व सरकार के समय से मिल रही 'सहारा योजना' जैसी महत्वपूर्ण कल्याणकारी सुविधाओं और मासिक भत्ते को तुरंत बहाल करने की मांग की। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि दिव्यांगों को मिलने वाली पुरानी सुविधाएं और अधिकार छीने जा रहे हैं, जो उनके जीने के अधिकार पर सीधा हमला है।
सरकार को अंतिम अल्टीमेटम देते हुए संघ ने साफ किया है कि आज का यह चक्का जाम तो महज एक शुरुआत है। यदि सरकार ने आज या कल के भीतर उनकी मांगों पर कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लिया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले चरण में पूरे हिमाचल प्रदेश से व्हीलचेयर के सहारे जीवन काटने वाले दिव्यांग साथियों को शिमला बुलाया जाएगा और वे अपनी व्हीलचेयर से सचिवालय सहित पूरे शिमला शहर की सभी प्रमुख सड़कों को पूरी तरह से ब्लॉक कर देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। समाचार लिखे जाने तक सभी प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर कड़ाके की धूप में सड़क पर डटे हुए थे और सचिवालय के बाहर माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना हुआ था।
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