सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, HGTU ने उठाई स्कूलों के विलय, आवश्यकता-आधारित ट्रांसफर, DA और पदोन्नति की मांग

हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान  ने शनिवार को ओतरकारों से रुबरु हिट हुए शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के अधिकारों, अदालती फैसलों और स्कूलों में घटती छात्र संख्या जैसे ज्वलंत मुद्दों पर संघ का रुख प्रमुखता से स्पष्ट किया।  वीरेंद्र चौहान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम 2024 को रद्द किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया और इसे राज्य के लाखों कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया।

Aug 1, 2026 - 19:27
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, HGTU ने उठाई स्कूलों के विलय, आवश्यकता-आधारित ट्रांसफर, DA और पदोन्नति की मांग

यंगवार्ता न्यूज - शिमला 1 अगस्त, 2026 : 

 हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान  ने शनिवार को ओतरकारों से रुबरु हिट हुए शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के अधिकारों, अदालती फैसलों और स्कूलों में घटती छात्र संख्या जैसे ज्वलंत मुद्दों पर संघ का रुख प्रमुखता से स्पष्ट किया।  वीरेंद्र चौहान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम 2024 को रद्द किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया और इसे राज्य के लाखों कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया।

वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सेवा शर्त अधिनियम वर्ष 2024 का यह एक्ट कर्मचारियों के हितों को रोकने का प्रयास था, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। अब कर्मचारियों को उनकी पहली नियुक्ति की तिथि से ही वरिष्ठता और वित्तीय लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 


प्रदेश में गिरते नामांकन (एनरोलमेंट) और लगातार बंद हो रहे स्कूलों पर चिंता जताते हुए चौहान ने कहा कि संघ केवल बयानबाज़ी नहीं करता, बल्कि नीतिगत सुधारों के लिए सदैव प्रयासरत रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय  वीरभद्र सिंह के समक्ष प्राथमिक कक्षाओं से अंग्रेजी माध्यम और प्री-प्राइमरी शिक्षा की मांग उठाई गई थी, जिसे 2018 में मंजूरी मिली थी। वहीं, 2017 में ज्वालाजी वर्कशॉप की रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी गई थी। वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और शिक्षा सचिव राकेश कंवर के प्रयासों की सराहना की, जिनके कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में 21वें स्थान से सुधरकर 5वें स्थान पर पहुंचा है। हालांकि, घटते नामांकन से शिक्षकों के नए पद और रोजगार समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए उन्होंने पहली से 12वीं तक के सभी स्कूलों का पूर्ण विलय (Complete Merger) करके एक एकीकृत संरचना तैयार करने का सुझाव दिया।


शिक्षकों की कार्य व्यवस्था और स्थानांतरण नीति पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए HGTU अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बच्चों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ा रहे उच्च पदस्थ शिक्षकों के प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि क्लस्टर सिस्टम और डेपुटेशन को अनावश्यक रूप से प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेपुटेशन स्थायी समाधान नहीं है, इसलिए विभाग में खाली पड़े पदों पर जल्द से जल्द नई भर्तियां की जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षकों के तबादलों पर लंबे समय से लगे बैन को हटाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों की पारिवारिक और मेडिकल समस्याओं को ध्यान में रखकर सरकार को साल में कम से कम दो बार 'आवश्यकता-आधारित' ट्रांसफर विंडो खोलनी चाहिए और इसके अधिकार संबंधित विभागों को देने चाहिए।


 वीरेंद्र चौहान ने शिक्षकों के संवर्ग, पदोन्नति और लंबित वित्तीय बकाए की मांगों को पुरजोर ढंग से उठाया। उन्होंने TGT से हेडमास्टर, JBT, C&V और प्रिंसिपल स्तर की लंबित पदोन्नतियों को शीघ्र पूरा करने की मांग की और धरने पर बैठे JBT शिक्षकों की पदोन्नति की मांग का पूर्ण समर्थन किया। इसके अलावा, JVT और C&V अध्यापकों के 5% अंतर-जिला तबादला कोटे को बहाल करने, TGT हिंदी व TGT संस्कृत को पदनाम के अनुसार उचित पे-स्केल देने, और C&V शिक्षकों को 20 वर्ष की सेवा के बाद मिलने वाली दो विशेष वेतन वृद्धियों (Special Increments) को दोबारा शुरू करने का आग्रह किया। डिप्टी डायरेक्टर पद को प्रोमोशनल पोस्ट बनाने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने क्लस्टर सिस्टम के तहत हर जिले में जॉइंट डायरेक्टर का पद सृजित करने का सुझाव दिया। अंत में, सीबीएसई संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग के साथ-साथ लंबित महंगाई भत्ते (DA) का उल्लेख करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से आगामी 15 अगस्त को कर्मचारियों के लिए कम से कम 5% डीए की घोषणा करने का आग्रह किया।

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