उद्योग मंत्री ने खुद खोली बैकडोर भर्ती की पोल, अब किस मुंह से मांग रहे सबूत? : राकेश जमवाल
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा से भ्रष्टाचार के सबूत मांगने से पहले मंत्री अपने उस सार्वजनिक बयान का जवाब दें, जिसमें उन्होंने स्वयं अपनी सिफारिश से 700 लोगों को रोजगार दिलाने का दावा किया था
यंगवार्ता न्यूज - मंडी 15 जुलाई, 2026 :
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा से भ्रष्टाचार के सबूत मांगने से पहले मंत्री अपने उस सार्वजनिक बयान का जवाब दें, जिसमें उन्होंने स्वयं अपनी सिफारिश से 700 लोगों को रोजगार दिलाने का दावा किया था। यदि यह दावा सही है तो यह प्रदेश में बैकडोर भर्ती का सबसे बड़ा उदाहरण और कांग्रेस सरकार की कथनी-करनी का खुला विरोधाभास है।
राकेश जमवाल ने कहा कि उद्योग मंत्री प्रदेश की जनता को यह बताएं कि आखिर उनकी सिफारिश से 700 लोगों को किस नियम, किस प्रक्रिया और किस चयन प्रणाली के तहत रोजगार मिला? यदि नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट के आधार पर हुई हैं तो मंत्री अपनी व्यक्तिगत सिफारिश का श्रेय क्यों ले रहे हैं? और यदि वास्तव में उनकी सिफारिश पर रोजगार मिला है तो यह बैकडोर भर्ती का सबसे बड़ा प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हर मंच से आउटसोर्स भर्ती और बैकडोर एंट्री का विरोध करने का दावा करते हैं, जबकि उनके ही उद्योग मंत्री सार्वजनिक मंच से अपनी सिफारिश पर 700 लोगों को रोजगार दिलाने की बात स्वीकार कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार बताए कि प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री की बात पर विश्वास करे या उद्योग मंत्री की स्वीकारोक्ति पर?
जमवाल ने कहा कि यदि प्रदेश में नौकरियां मंत्री और नेताओं की सिफारिश से ही दी जानी थीं तो फिर पूर्व की चयन व्यवस्था को समाप्त कर नया चयन आयोग बनाने का नाटक क्यों किया गया? क्या पूर्व की सरकार से चले आ रहे चयन आयोग को केवल इसलिए भंग किया गया ताकि जनता की आंखों में धूल झोंकी जा सके? कांग्रेस ने दावा किया था कि नया आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती करेगा, लेकिन अब उनके मंत्री ही सिफारिशी नियुक्तियों का श्रेय लेने में गर्व महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कांग्रेस ने हर वर्ष एक लाख और पांच वर्षों में पांच लाख युवाओं को रोजगार देने की गारंटी दी थी। आज साढ़े तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन रोजगार देने की बजाय प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को केवल आवेदन फार्म भरने, परीक्षा फीस जमा करने और भर्ती का इंतजार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार युवाओं से फीस के नाम पर उगाही कर रही है, जबकि अपने चहेतों और सिफारिश वालों को नौकरी देने का दावा उसके मंत्री स्वयं कर रहे हैं।
राकेश जमवाल ने कहा कि हिमाचल का युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। लाखों पढ़े-लिखे बेरोजगार वर्षों से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस सरकार के मंत्री मंचों से सिफारिशी रोजगार की उपलब्धियां गिना रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता मेरिट नहीं बल्कि सिफारिश है।
भाजपा नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उद्योग मंत्री प्रदेश के अन्य कांग्रेस मंत्रियों और विधायकों को भी यह "रोजगार देने का मूलमंत्र" बता दें कि आखिर बिना पारदर्शी प्रक्रिया के सैकड़ों लोगों को नौकरी दिलाने का फार्मूला क्या है। ताकि कांग्रेस के बाकी मंत्री और विधायक भी इस फॉर्मूले का इस्तेमाल कर अपने-अपने क्षेत्रों में जनता को जवाब देने लायक बन सकें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने युवाओं को झूठी गारंटियां, अधूरी भर्तियां और बेरोजगारी दी है। अब जब मंत्री स्वयं सिफारिशी रोजगार की बात स्वीकार कर रहे हैं तो भाजपा द्वारा उठाए गए सवालों से बचने के लिए भ्रष्टाचार के सबूत मांगना केवल जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है।
राकेश जमवाल ने कहा कि भाजपा युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। कांग्रेस सरकार को हर उस नियुक्ति का हिसाब देना होगा जो नियमों से हटकर या राजनीतिक सिफारिश के आधार पर की गई है।
अंत में उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव झूठी गारंटियों और सिफारिश की राजनीति पर जनता का फैसला होगा। जिस कांग्रेस ने युवाओं को रोजगार के सपने दिखाए थे, वही आज बेरोजगारों के साथ अन्याय कर रही है। आने वाले चुनाव में प्रदेश की जनता कांग्रेस को ऐसा जवाब देगी कि उसके नेताओं को अपने ही विधानसभा क्षेत्रों में जनता का सामना करना मुश्किल हो जाएगा।
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