प्रदेश में जिला परिषद का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सियासी ताकत का बड़ा इम्तिहान होगा साबित 

हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सियासी ताकत का बड़ा इम्तिहान साबित होगा। मंत्रियों और विधायकों की साख सीधे तौर पर दांव पर लगी है। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा

Apr 18, 2026 - 12:37
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प्रदेश में जिला परिषद का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सियासी ताकत का बड़ा इम्तिहान होगा साबित 

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    18-04-2026

हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सियासी ताकत का बड़ा इम्तिहान साबित होगा। मंत्रियों और विधायकों की साख सीधे तौर पर दांव पर लगी है। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। करीब डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा जिला परिषद चुनाव में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। 

राजनीतिक दृष्टि से जिला परिषद के चुनाव में जिला शिमला इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला है। यहां से कांग्रेस के तीन मंत्री और चार विधायक आते हैं, जबकि चौपाल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का प्रतिनिधित्व है। ऐसे में शिमला जिला परिषद के नतीजे सीधे तौर पर कांग्रेस के प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती का संकेत देंगे। यदि यहां कांग्रेस कमजोर पड़ती है तो यह पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है, वहीं भाजपा इसे बड़े मौके के रूप में देख रही है। 

राज्य सरकार के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिष्ठा भी इन चुनावों से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हमीरपुर जिला से आते हैं जबकि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ऊना जिले से हैं। कांगड़ा जिले से दो मंत्री यादवेंद्र गोमा और चंद्र कुमार हैं। जिला सोलन से धनीराम शांडिल, सिरमौर से हर्षवर्धन चौहान और किन्नौर से जगत सिंह नेगी मंत्री हैं। जिला चंबा से विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया हैं। इन सभी जिलों में चुनाव परिणाम संबंधित मंत्रियों के प्रभाव और जनाधार की परीक्षा लेंगे।

विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस के 40 और भाजपा के 28 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस जहां अपनी बढ़त को मजबूत करने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा इन चुनावों के जरिए वापसी का संदेश देने का प्रयास करेगी। जिला परिषद चुनावों में जीत-हार का असर सीधे तौर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा और यही मनोबल आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

जिला परिषद चुनावों के नतीजे प्रदेश की सियासत की दिशा तय भी कर सकते हैं। अगर कांग्रेस अपना दबदबा बनाए रखती है तो यह सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर मानी जाएगी, जबकि भाजपा के बेहतर प्रदर्शन से यह संकेत मिलेगा कि विपक्ष अभी भी मजबूत चुनौती देने की स्थिति में है।

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