प्रदेश हाईकोर्ट ने न केवल वन भूमि अतिक्रमण पर बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही अनियमितताओं पर लिया संज्ञान  

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने न केवल वन भूमि अतिक्रमण पर बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही अनियमितताओं पर भी संज्ञान लिया है। न्यायालय में सुनवाई के दौरान पाया गया कि पुराने अतिक्रमण मामले में कार्रवाई गलत तरीके से चल रही

Aug 22, 2025 - 11:35
Aug 22, 2025 - 11:49
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प्रदेश हाईकोर्ट ने न केवल वन भूमि अतिक्रमण पर बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही अनियमितताओं पर लिया संज्ञान  
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यंगवार्ता न्यूज़ -  शिमला     22-08-2025

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने न केवल वन भूमि अतिक्रमण पर बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही अनियमितताओं पर भी संज्ञान लिया है। न्यायालय में सुनवाई के दौरान पाया गया कि पुराने अतिक्रमण मामले में कार्रवाई गलत तरीके से चल रही है, जिससे मामले के निस्तारण में अनावश्यक देरी हो रही है। 

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने तहसीलदार भुंतर जिला कुल्लू को छठे प्रतिवादी के रूप में और सत्या देवी को सातवें प्रतिवादी के रूप में मामले में शामिल करने के आदेश दिए हैं। अदालत में इन सभी को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर प्रतिवादियों को हलफनामा दायर कर मामले से अदालत से संबंधित सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। 

खंडपीठ ने संभागीय वन अधिकारी और तहसीलदार भुंतर को उनके अधिकार क्षेत्र में सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के न्यायालय में और अधिकारियों के पास लंबित सभी मामलों का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

भुंतर में हाथिथान गांव के निवासी सत्या देवी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक परिसर, भूमि बेदखली और किराया वसूली अधिनियम 1971 के तहत 11 जुलाई 2016 को बेदखली का आदेश जारी किया गया था। सत्या देवी ने इस आदेश को अपील के माध्यम से मंडल आयुक्त मंडी के समक्ष चुनौती दी। 

19 अक्तूबर 2016 को मंडल आयुक्त ने बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया और सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी भुंतर को हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम 1954 की धारा 163 (3) के तहत मामले को सिविल कोर्ट में बदलकर फिर से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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