प्रदेश के स्कूलों में 870 शारीरिक शिक्षकों की प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर देरी के साये में 

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में 870 शारीरिक शिक्षकों (PET) की प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर देरी के साये में नजर आ रही है। इसको लेकर बेरोजगार शारीरिक कल्याण संगठन में चिंता बढ़ गई है कि कहीं पंचायत चुनाव के चलते यह भर्ती प्रक्रिया फिर से अधर में न लटक जाए

Mar 29, 2026 - 12:59
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प्रदेश के स्कूलों में 870 शारीरिक शिक्षकों की प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर देरी के साये में 
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    29-03-2026

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में 870 शारीरिक शिक्षकों (PET) की प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर देरी के साये में नजर आ रही है। इसको लेकर बेरोजगार शारीरिक कल्याण संगठन में चिंता बढ़ गई है कि कहीं पंचायत चुनाव के चलते यह भर्ती प्रक्रिया फिर से अधर में न लटक जाए।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश राजपूत ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा जिलों से मांगा गया आवश्यक रिकॉर्ड अभी तक समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि 19 मार्च को शिक्षा विभाग, शिमला ने सभी जिलों से पांच दिनों के भीतर जरूरी दस्तावेज और आंकड़े भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकांश जिलों से यह जानकारी अब तक नहीं पहुंची है।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि इसी तरह देरी होती रही तो आगामी पंचायत चुनाव के दौरान लागू होने वाले आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) के कारण भर्ती प्रक्रिया फिर रुक सकती है। इससे हजारों पात्र अभ्यर्थियों को एक बार फिर निराशा हाथ लग सकती है। 

डॉ. राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्वयं आश्वासन दिया था कि पंचायत चुनाव से पहले भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। लेकिन विभागीय स्तर पर हो रही देरी से यह वादा अधूरा रह सकता है।

उन्होंने बताया कि शारीरिक शिक्षकों की यह भर्ती पिछले 8-9 वर्षों से विभिन्न कारणों के चलते लंबित है। अब जब सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, तो विभागीय लापरवाही के कारण फिर अनिश्चितता की स्थिति बन रही है। 

बेरोजगार शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती न होने के कारण कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा प्रभावित हो रही है। वहीं, प्रदेश के स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था और अनुशासन पर भी असर पड़ रहा है। खेल गतिविधियों के अभाव में बच्चों में नकारात्मक प्रवृत्तियां बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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