ऐतिहासिक शहर में जोड़ मेले को लेकर तैयारियां शुरू , गुरु गोविंद सिंह जी के नाहन आगमन की खुशी में मनाया जाता है मेला 

ऐतिहासिक शहर नाहन में गुरु गोविंद सिंह जी के नाहन आगमन दिवस की खुशी में मनाए जाने वाले जोड़ मेले को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सिख नौजवान जत्था और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से 10 दिवसीय जोड़ मेले का आयोजन किया जा रहा है। मीडिया से बात करते हुए दशमेश अस्थान गुरुद्वारा साहिब नाहन के मुख्य ग्रंथि लक्ष्मण सिंह ने बताया कि सिरमौर रियासत के तत्कालीन शासन मेधनी प्रकाश के निवेदन पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी नाहन पधारे थे और इस खुशी में जोड़ मेले का आयोजन उनके आगमन दिवस पर किया जाता है

Apr 24, 2026 - 10:54
Apr 24, 2026 - 12:06
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ऐतिहासिक शहर में जोड़ मेले को लेकर तैयारियां शुरू , गुरु गोविंद सिंह जी के नाहन आगमन की खुशी में मनाया जाता है मेला 
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  24-04-2026
ऐतिहासिक शहर नाहन में गुरु गोविंद सिंह जी के नाहन आगमन दिवस की खुशी में मनाए जाने वाले जोड़ मेले को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सिख नौजवान जत्था और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से 10 दिवसीय जोड़ मेले का आयोजन किया जा रहा है। मीडिया से बात करते हुए दशमेश अस्थान गुरुद्वारा साहिब नाहन के मुख्य ग्रंथि लक्ष्मण सिंह ने बताया कि सिरमौर रियासत के तत्कालीन शासन मेधनी प्रकाश के निवेदन पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी नाहन पधारे थे और इस खुशी में जोड़ मेले का आयोजन उनके आगमन दिवस पर किया जाता है। 
उन्होंने बताया कि नाहन शहर में इस बार 26 अप्रैल से 5 मई तक जोड़ मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को इस ऐतिहासिक जोड़ मेले का शुभारंभ स्थानीय विधायक अजय सोलंकी द्वारा किया जाएगा। मेले की शुरुआत 26 अप्रैल को एक भव्य नगर कीर्तन के साथ होगी, जो टोका साहिब से नाहन पहुंचेगा। इसके बाद 28 अप्रैल को शहर में एक और विशाल नगर कीर्तन निकाला जाएगा, जिसमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी में 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक अखंड पाठ का आयोजन किया जाएगा, जहां गुरबाणी की अमृतवाणी वातावरण को पवित्र बनाएगी। 
उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल को अखंड पाठ के समापन के बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कीर्तन दरबार सजाया जाएगा वहीं 1 मई को आयोजित विशेष कीर्तन दरबार में रागी जत्थे अपनी मधुर वाणी से संगत को निहाल करेंगे। उन्होंने बताया कि यह जोड़ मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और एकता का भी जीवंत उदाहरण है।

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