जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी से करें अधिकारी : अनुपम कश्यप 

अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई

Jul 10, 2025 - 15:45
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जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी से करें अधिकारी : अनुपम कश्यप 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला      10-07-2025

अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई।बैठक में अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत विभिन्न प्रावधानों, उपबंधों के कार्यान्वयन, पीड़ितों को दी गई राहत राशि एवं पुनर्वास सुविधाओं के लिए जिम्मेदार विभिन्न अधिकारियों, अभिकरणों की भूमिका की समीक्षा की गई। 

उपरोक्त अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं के अंतर्गत पीड़ितों को न्यूनतम 85 हजार रुपए और अधिकतम 8 लाख 25 हजार रुपए की राहत राशि का प्रावधान है।जिला शिमला में अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत 2018 से लेकर अभी तक कुल 33 मामले लंबित है। 

वहीं 1 जनवरी 2025 से लेकर 30 जून 2025 तक 9 मामले जिला के विभिन्न थानों में पंजीकृत हुए है। उपायुक्त ने कहा कि समाज के सभी हितधारकों को एकत्रित होकर कार्य करना होगा। अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी से करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए प्रयास करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। 

इस अधिनियम के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें ताकि गलत के विरुद्ध समय रहते अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ सके। मामलों में दोषमुक्ति की संख्या बढ़ना चिंतनीय है इसलिए मामलों की जांच सही दिशा में होना जरूरी है ताकि शोषण करने वाले को सजा मिल सके।

अनुपम कश्यप ने जिला कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के न्यायालय में लंबित हर मामले के बारे हर माह यथास्थिति के बारे में सूचना उपायुक्त को देना अनिवार्य है ताकि हर मामले के शीघ्र निपटारे की दिशा में प्रभावी तरीके से कार्य किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि उक्त अधिनियम के तहत अभियोजन समय पर शुरू करने के लिए 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करना और आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य है। राज्य, जिला और उप-मंडल स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समितियों द्वारा अपनी-अपनी बैठकों में पीड़ितों और गवाहों के न्याय तक पहुंच के अधिकार और हक के लिए योजना की समय-समय पर समीक्षा करने का प्रावधान है।

जिला पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने बैठक में कहा कि पुलिस अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत पंजीकृत मामलों की तथ्यों पर आधारित निष्पक्ष जांच करती है। उन्होंने जिला के सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच सही तरीके से निर्धारित समय पर करें। जो जांच अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस बैठक में जिला न्यायवादी मुक्ता कश्यप, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवदीप सिंह, जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा, डीएसपी विजय रघुवंशी, डीएसपी विक्रम चौहान, डीएसपी शक्ति, डीएसपी प्रणव चौहान, डीएसपी नरेश शर्मा, बी आर जस्टा, नरेंद्र गर्ग, मीनाक्षी, सहित कई मौजूद रहे।


यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 

अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई।बैठक में अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत विभिन्न प्रावधानों, उपबंधों के कार्यान्वयन, पीड़ितों को दी गई राहत राशि एवं पुनर्वास सुविधाओं के लिए जिम्मेदार विभिन्न अधिकारियों, अभिकरणों की भूमिका की समीक्षा की गई। 

उपरोक्त अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं के अंतर्गत पीड़ितों को न्यूनतम 85 हजार रुपए और अधिकतम 8 लाख 25 हजार रुपए की राहत राशि का प्रावधान है।जिला शिमला में अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत 2018 से लेकर अभी तक कुल 33 मामले लंबित है। 

वहीं 1 जनवरी 2025 से लेकर 30 जून 2025 तक 9 मामले जिला के विभिन्न थानों में पंजीकृत हुए है। उपायुक्त ने कहा कि समाज के सभी हितधारकों को एकत्रित होकर कार्य करना होगा। अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी से करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए प्रयास करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। 

इस अधिनियम के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें ताकि गलत के विरुद्ध समय रहते अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ सके। मामलों में दोषमुक्ति की संख्या बढ़ना चिंतनीय है इसलिए मामलों की जांच सही दिशा में होना जरूरी है ताकि शोषण करने वाले को सजा मिल सके।

अनुपम कश्यप ने जिला कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के न्यायालय में लंबित हर मामले के बारे हर माह यथास्थिति के बारे में सूचना उपायुक्त को देना अनिवार्य है ताकि हर मामले के शीघ्र निपटारे की दिशा में प्रभावी तरीके से कार्य किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि उक्त अधिनियम के तहत अभियोजन समय पर शुरू करने के लिए 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करना और आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य है। राज्य, जिला और उप-मंडल स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समितियों द्वारा अपनी-अपनी बैठकों में पीड़ितों और गवाहों के न्याय तक पहुंच के अधिकार और हक के लिए योजना की समय-समय पर समीक्षा करने का प्रावधान है।

जिला पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने बैठक में कहा कि पुलिस अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत पंजीकृत मामलों की तथ्यों पर आधारित निष्पक्ष जांच करती है। उन्होंने जिला के सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच सही तरीके से निर्धारित समय पर करें। जो जांच अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस बैठक में जिला न्यायवादी मुक्ता कश्यप, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवदीप सिंह, जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा, डीएसपी विजय रघुवंशी, डीएसपी विक्रम चौहान, डीएसपी शक्ति, डीएसपी प्रणव चौहान, डीएसपी नरेश शर्मा, बी आर जस्टा, नरेंद्र गर्ग, मीनाक्षी, सहित कई मौजूद रहे।

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