प्राकृतिक खेती में है बड़ी कमाई, रिटायर्ड प्रिंसिपल ने उगाई कई क्विंटल हल्दी  

प्राकृतिक खेत को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने तथा इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयास काफी अच्छे परिणाम ला रहे हैं। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं को 60 रुपये प्रति किलो और मक्की को 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही

Jan 20, 2026 - 12:15
 0  28
प्राकृतिक खेती में है बड़ी कमाई, रिटायर्ड प्रिंसिपल ने उगाई कई क्विंटल हल्दी  
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

बेटा डॉक्टर और बहू भी सरकारी अफसर, पर नहीं छोड़ी है खेती

भोरंज क्षेत्र की भुक्कड़ पंचायत के सुभाष कपिला अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

यंगवार्ता न्यूज़ - हमीरपुर   20-01-2026

प्राकृतिक खेत को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने तथा इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयास काफी अच्छे परिणाम ला रहे हैं। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं को 60 रुपये प्रति किलो और मक्की को 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है, वहीं कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो दाम निर्धारित किया गया है।  
 
प्रदेश सरकार की इस योजना से प्रभावित होकर हल्दी की खेती शुरू करने वाले भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राहम्णा के शिक्षाविद सुभाष कपिला और उनकी धर्मपत्नी उर्मिला कपिला ने इस सीजन में लगभग दस क्विंटल हल्दी पैदा करके क्षेत्र के किसानों-बागवानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
 
स्कूल प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त 76 वर्षीय सुभाष कपिला और शिक्षा विभाग से ही टीजीटी के पद से सेवानिवृत्त उनकी धर्मपत्नी उर्मिला कपिला का बेटा डेंटल सर्जन और बहू सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद सुभाष कपिला और उर्मिला कपिला ने खेती नहीं छोड़ी है। वे अपने खेतों में रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं।
 
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया और इस विधि से उगाई जाने वाली फसलों के लिए अलग से उच्च दाम निर्धारित किए तो वयोवृद्ध कपिला दंपत्ति ने हल्दी उगाने का निर्णय लिया। 

उन्होंने कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा और अन्य अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया तथा विभाग से हल्दी का बीज भी लिया। सुभाष कपिला ने बताया कि इस सीजन में उन्हें लगभग 10 क्विंटल पैदावार हुई है। उनका कहना है कि हल्दी की खेती में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है और यह ऐसी फसल है, जिसे जंगली जानवर कोई नुक्सान नहीं पहुंचाते हैं। 

इसके लिए रासायनिक खाद या कीटनाशकों की जरुरत भी नहीं होती है। प्रदेश सरकार इसे 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है। इसलिए, हल्दी की खेती में किसानों को फायदा ही फायदा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow