अब कई दिनों तक खराब नहीं होंगे खाद्य पदार्थ , रहेंगे तरोताजा , हिमाचल के शोधकर्ताओं की मिली सफलता

यदि हिमाचल प्रदेश के शोधकर्ताओं की जुगत काम आई तो लंबे समय तक खाद्य पदार्थ खराब नहीं होंगे और इन्हें लंबे समय तक करो ताजा रखा जा सकेगा। हिमाचल के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण की ओर एक अहम कदम बढ़ाते हुए खाद्य पैकेजिंग उद्योग के लिए बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग फिल्म तैयार की है जो खाद्य पदार्थों को तरोताजा रखने के लिए वरदान साबित होगी या यूं कहे कि अब खाने पीने की वस्तुएं लंबे समय तक फ्रेश रह सकेगी

Mar 31, 2024 - 19:34
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अब कई दिनों तक खराब नहीं होंगे खाद्य पदार्थ , रहेंगे तरोताजा , हिमाचल के शोधकर्ताओं की मिली सफलता
 
यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी  31-03-2024
यदि हिमाचल प्रदेश के शोधकर्ताओं की जुगत काम आई तो लंबे समय तक खाद्य पदार्थ खराब नहीं होंगे और इन्हें लंबे समय तक करो ताजा रखा जा सकेगा। हिमाचल के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण की ओर एक अहम कदम बढ़ाते हुए खाद्य पैकेजिंग उद्योग के लिए बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग फिल्म तैयार की है जो खाद्य पदार्थों को तरोताजा रखने के लिए वरदान साबित होगी या यूं कहे कि अब खाने पीने की वस्तुएं लंबे समय तक फ्रेश रह सकेगी। जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के युगल शोधकर्ताओं डॉक्टर क्षमा शर्मा और डॉक्टर विजय कुमार द्वारा नीम के गोंद से एक ऐसी फिल्म तैयार की है जो खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक फ्रेश रख सकेगा। 
हिमाचल प्रदेश के धर्मपुर से संबंध रखने वाले डॉक्टर क्षमा शर्मा और उनके पति डॉ विजय कुमार शर्मा द्वारा इस विषय में एक अहम कदम बढ़ाया है। यह जल्दी खराब होने वाले खाद्य सामग्री की पैकिंग के लिए यह फिल्म प्रयोग की जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से खाने-पीने की चीजों को सड़ने, गलने और खराब होने से बचाया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बहुत बढ़ावा मिलेगा। यह पैकेजिंग फिल्म उत्कृष्ट श्वसन क्षमता प्रदान करती है, जो ऑक्सीजन को गुजरने देती है और भोजन को बिना किसी दुष्प्रभाव के लंबे समय तक ताजा रखती है। पैकेजिंग फिल्म में लचीलापन और पारभासी उपस्थिति है, जो इसे व्यावसायिकरण के लिए उपयोगी बनाती है। 
 
यह बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग फिल्म पीटीयू , एनआईटी श्रीनगर और डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ के प्रोफेसरों की टीम ने तैयार की है। भारत सरकार ने इस शोध पर 20 साल के लिए पेटेंट प्रदान किया है। इस टीम में धर्मपुर से डॉ. क्षमा शर्मा और उनके पति डॉ. विजय कुमार और उनकी टीम शामिल है। पिछले चार सालों से लेकर शोध किया जा रहा था। अब इसमें सफलता प्राप्त हुई है। गौर हो कि डॉ. क्षमा शर्मा डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं जबकि डॉ. विजय कुमार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। 
 
उन्होंने बताया कि नीम के तनों की गोंद से प्लास्टिक जैसी दिखने वाली फिल्म तैयार की है। इसमें एगरोज , नीम गोंद, हाइड्रॉक्सी पेटाइट और पॉली सोर्बेट 80 आदि तत्व शामिल हैं। डॉ. क्षमा ने कहा कि यह पैकेजिंग फिल्म प्लास्टिक और एल्यूमीनियम पैकेजिंग की तरह पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती हैं। हमारी टीम ने पैकेजिंग फिल्म के संश्लेषण के लिए हरित विधियों और हरित सामग्री का उपयोग किया है। पैकेजिंग में इसके लचीलेपन, दीर्घायु, प्लास्टिसिटी और मनुष्यों के लिए उपयोगी होने के कारण यह बेहद अहम है। इसके विपरीत दूसरी प्लास्टिक पैकेजिंग मनुष्यों, जानवरों और पौधों के लिए बहुत हानिकारक साबित हुई है।

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