राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा पर नामांकन में संपत्ति छिपाने का आरोप, निर्वाचन आयोग को शिकायत

हिमाचल प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के विवरण छिपाने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज

Mar 9, 2026 - 16:30
 0  7
राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा पर नामांकन में संपत्ति छिपाने का आरोप, निर्वाचन आयोग को शिकायत
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

सरकारी ठेके, धारा 9A और अपूर्ण हलफनामे को लेकर सवाल

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    09-03-2026

हिमाचल प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के विवरण छिपाने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच द्वारा दायर की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि अनुराग शर्मा, निवासी गांव बीड़, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा को 7 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। लेकिन उनके नामांकन के साथ दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जो कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के तहत अनिवार्य है।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि कानून के अनुसार किसी भी प्रत्याशी को नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी तथा अपने परिवार की चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि कोई जानकारी जानबूझकर छिपाई जाती है तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है।

दायर शिकायत के अनुसार निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से यह सामने आया है कि अनुराग शर्मा द्वारा कई भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में नहीं दिया गया। इनमें जिला कांगड़ा के बैजनाथ और मुल्थान क्षेत्रों के साथ-साथ जिला मंडी के जोगिंदरनगर क्षेत्र में स्थित कई भूमि खातों का विवरण शामिल है। शिकायत में इन संपत्तियों के खाता नंबर और संबंधित गांवों का भी उल्लेख किया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि संपत्ति के अलावा एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित विवरण भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही प्रकार से प्रदर्शित नहीं किया गया। इस प्रकार महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है।

इसके अतिरिक्त शिकायत में पैरा 7 के तहत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अनुराग शर्मा नामांकन दाखिल करते समय एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के लगभग 16 करोड़ रुपये के ठेके चल रहे थे, जिनके कार्य अभी प्रगति पर बताए गए हैं। धारा 9A के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पास सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध हो तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव द्वारा आनन-फानन में प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हैं तो उसके संबंध में स्पष्ट स्थिति होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था।

अधिवक्ता निताशा कटोच ने अपनी शिकायत में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125A के तहत भी कार्रवाई योग्य बनता है, क्योंकि चुनावी हलफनामे में गलत या अपूर्ण जानकारी देना दंडनीय अपराध है।

उन्होंने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रह सके।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow