एक अप्रैल से हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को नहीं मिलेंगी मुफ्त बस सुविधा  

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा एक अप्रैल से अब मुफ्त नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा

Mar 15, 2026 - 16:15
Mar 15, 2026 - 19:14
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एक अप्रैल से हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को नहीं मिलेंगी मुफ्त बस सुविधा  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    15-03-2026 

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा एक अप्रैल से अब मुफ्त नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।

सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लाखों विद्यार्थी स्कूल दूर होने के चलते एचआरटीसी बसों में आते-जाते हैं। अब इन्हें हिम बस पास बनवाना अनिवार्य है। पास के लिए लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त 40 रुपये की फीस भी देनी पड़ेगी।

निशुल्क बस सेवा के लिए शुल्क की अनिवार्यता गरीब वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बीते कई वर्षों से निशुल्क बस सुविधा का लाभ मिलता आ रहा है। अब एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर नए आदेशों के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। 

निगम ने ऑनलाइन सुविधा के नाम पर यह नई व्यवस्था लागू की है। इसका सबसे अधिक असर उन गरीब परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। प्रदेश सरकार दशकों से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से संबंध रखने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए निशुल्क परिवहन सुविधा, फ्री वर्दी समेत नाममात्र की फीस देकर शिक्षित करने का जिम्मा उठा रही है। 

अब वर्दी योजना में बदलाव के बाद एचआरटीसी की ऑनलाइन सुविधा के नाम पर लाखों अभिभावकों से पास बनवाने के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली करने की तैयारी की जा रही है। इसको लेकर अभिभावकों में खासा रोष है। लोगों का कहना है कि जो परिवार इस राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं, उनके बच्चे इसी वजह से शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाएंगे या फिर उन्हें कई किलोमीटर का पैदल सफर करके स्कूल पहुंचना होगा।

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