सोलन के टेथिस फॉसिल म्यूजियम के स्थापना दिवस पर देश-विदेश के फॉसिल वैज्ञानिकों और  शोधकर्ताओं को मिला सम्मान

सोलन जिला के धर्मपुर के समीप डंग्यारी गांव में हिमाचल प्रदेश के एकमात्र निजी   टेथिस फॉसिल म्यूजियम ने अपना तीसरा स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर डीसी सोलन मनमोहन शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों से अग्रणी वैज्ञानिकों, छात्रों, शिक्षकों और  लोगों ने भाग लिया। डीसी सोलन ने इस म्यूजियम के लिए जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. रितेश आर्य को बधाई दी और उनके साथ जीवाश्म संरक्षण यात्रा को याद किया

Apr 13, 2025 - 19:04
Apr 13, 2025 - 19:37
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सोलन के टेथिस फॉसिल म्यूजियम के स्थापना दिवस पर देश-विदेश के फॉसिल वैज्ञानिकों और  शोधकर्ताओं को मिला सम्मान
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यंगवार्ता न्यूज़ - सोलन  13-04-2025


सोलन जिला के धर्मपुर के समीप डंग्यारी गांव में हिमाचल प्रदेश के एकमात्र निजी   टेथिस फॉसिल म्यूजियम ने अपना तीसरा स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर डीसी सोलन मनमोहन शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों से अग्रणी वैज्ञानिकों, छात्रों, शिक्षकों और  लोगों ने भाग लिया। डीसी सोलन ने इस म्यूजियम के लिए जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. रितेश आर्य को बधाई दी और उनके साथ जीवाश्म संरक्षण यात्रा को याद किया। अपने संबोधन में कहा कि जब वह ब्लॉक डवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) के रूप में कार्य कर रहे थे, तब उन्होंने पहली बार डॉ. रितेश आर्य को फॉसिल ट्री को संरक्षित करने के लिए जुनून के साथ काम करते देखा था। उन्होंने प्रमुख जीवाश्म स्थलों को संरक्षित भू-विरासत क्षेत्र घोषित करने के डॉ. आर्य के मिशन का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। 

उन्होंने कहा कि यह देखना आश्चर्यजनक है कि कैसे एक फॉसिल ट्री से शुरू हुआ जुनून एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल गया है। इस कार्यक्रम में द मेकिंग ऑफ़ द टेथिस जीवाश्म संग्रहालय नामक एक लघु वृत्तचित्र का प्रीमियर दिखाया गया , जिसमें डॉ. रितेश आर्य की जीवाश्म खोज और संग्रहालय के निर्माण की 30+ साल की यात्रा को दर्शाया गया, जिसे परिवार, दोस्तों और स्थानीय समुदाय ने समर्थन दिया। स्थानीय गांव की एक छठी कक्षा की छात्रा ट्विंकल ने जीवाश्मों के साथ अपने अनुभव   बातचीत की। मुझे जीवाश्म पसंद हैं क्योंकि वे लाखों साल पहले के जानवरों और पेड़ों की कहानियां बताते हैं। इस मौके पर देश-विदेश के फॉसिल वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर जीवाश्म विज्ञान और स्ट्रेटीग्राफी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रो. एस.बी. भाटिया को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। पोस्ट डॉक्टरल फेलो श्रेणी में डॉ. वी. मिर्जा यूनिवर्सिटी डी मोंटपेलियर (फ्रांस) को 10,000 नकद और सर्वश्रेष्ठ जीवाश्म खोज पुरस्कार 2025 देकर सम्मानित किया। 
इसके अलावा नागालैंड विवि के एलोनो थोरी , अशोक विश्वविद्यालय के आकाश श्रीनिवास, केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के असगर हुसैन , केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के तुषार रंजन मोहंती को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए। छात्र श्रेणी वर्ग में  सिमरन बंसल (पंजाब विश्वविद्यालय) - 10,000 नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र दियागया। इसके अलावा  पंजाब यूनिवर्सिटी की इशानी शर्मा व ख़ुशी आर्य सिंह,  गया केंद्रीय विश्वविद्यालय के पार्थसारथी बिस्वाल और राजेश स्वैनको उनके कार्य के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए। अकादमिक अनुसंधान उत्कृष्टता के पुरस्कार विजेता रहे पंजाब यूनिवर्सिटी के डॉ. बी.पी. सिंह। गया केंद्रीय विश्वविद्यालय के गया मिलन के. शर्मा और बीरबल साहनी पुरा विज्ञान संस्थान के डॉ. विवेश कपूर को प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए।

 इसके अलावा कार्यक्रम में निर्णायक मंडल में शामिल पंजाब यूनिवर्सिटी के  प्रो. ओम एन. भार्गव, प्रो. विनोद तिवारी (वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान), प्रो. जीवीआर प्रसाद (दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. वी.पी. मिश्रा (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण), डॉ. जगमोहन सिंह (पूर्व ओएनजीसी वैज्ञानिक) को भी सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर बोलते हुए प्रसिद्ध जीवाश्म विज्ञानी और संग्रहालय के संरक्षक प्रो. अशोक साहनी ने कहा कि यह भारतीय फॉसिल विज्ञान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। टेथिस फॉसिल पुरस्कार जीवाश्म खोजकर्ताओं और भू-विरासत अधिवक्ताओं की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। अनुभवी हिमालयी भूविज्ञानी और जूरी सदस्य प्रो. ओम भार्गव ने कहा कि फॉसिल पृथ्वी के विकासवादी रहस्यों को उजागर करने की कुंजी हैं। इस मौके पर पद्मा , जिला पर्यटन अधिकारी, ने संग्रहालय की भूमिका की सराहना की।

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