एनटीए की संस्थागत विफलता के खिलाफ़ एसएफ़आई का उग्र प्रदर्शन, पूरी राज्य कमेटी ने दी गिरफ्तारियां
यंगवार्ता न्यूज शिमला 11 जून, 2026 : स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई), हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने आज राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की लगातार विफलताओं और देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में उसकी अक्षमता के खिलाफ़ शिमला स्थित उपायुक्त कार्यालय के समीप एक उग्र एवं संघर्षपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन के दौरान एसएफ़आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियाँ देकर अपना विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी आज देश के करोड़ों विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक अक्षमता, जवाबदेही के अभाव और छात्र हितों की घोर उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने की घटनाएँ, तकनीकी अव्यवस्थाएँ तथा अन्य अनियमितताओं ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन विफलताओं का खामियाज़ा देशभर के लाखों विद्यार्थियों ने भुगता है और हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थी भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। नीट-यूजी पेपर लीक, यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने की घटनाएँ, सीयूईटी तथा अन्य परीक्षाओं से जुड़ी लगातार अनियमितताओं ने भारत की परीक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरे संकट को उजागर कर दिया है। हर रद्द हुई परीक्षा, हर पेपर लीक और हर तकनीकी विफलता के पीछे लाखों विद्यार्थियों के सपने, वर्षों की मेहनत और उनका भविष्य दाँव पर लगा हुआ है। बार-बार की विफलताओं के बावजूद एनटीए का अस्तित्व बनाए रखना केंद्र सरकार की छात्र समुदाय के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।यह संकट किसी एक परीक्षा या एक वर्ष तक सीमित नहीं है। पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक और 48 पुनर्परीक्षाओं की घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिसने करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में धकेल दिया है। हाल ही में नीट-यूजी 2026 से जुड़े विवादों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। इसके अतिरिक्त, जून 2024 में यूजीसी-नेट परीक्षा को आयोजित होने के मात्र एक दिन बाद रद्द करना पड़ा, जिससे 9 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। यह स्वयं शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकार किया गया था कि परीक्षा की "इंटीग्रिटी" से समझौता होने की आशंका है। ऐसी घटनाएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विद्यार्थियों को एक विश्वसनीय, पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने में विफल रही है। एसएफ़आई केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की कड़ी निंदा करती है। शिक्षा मंत्रालय विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहा है। समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार ने लगातार अपनी जिम्मेदारी से बचने और विद्यार्थियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है। एसएफ़आई ने अपने स्थापना काल से ही शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों, सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा तथा छात्रों के हितों पर हो रहे नवउदारवादी हमलों के विरुद्ध लगातार संघर्ष किया है। फीस वृद्धि, शिक्षा के निजीकरण, सार्वजनिक निवेश में कटौती, छात्र संघों पर हमले अथवा परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं, हर मुद्दे पर एसएफ़आई ने छात्रों की आवाज़ बुलंद की है। आज का यह प्रदर्शन उसी संघर्षशील विरासत और सार्वजनिक शिक्षा के प्रति हमारी अडिग प्रतिबद्धता का प्रमाण है। NTA से जुड़ा यह संकट कोई साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाला एक विशाल राष्ट्रीय संकट है। ऐसे समय में जब छात्र पहले से ही कठिन प्रतिस्पर्धा और बढ़ते आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं, सरकार परीक्षा प्रणाली की बुनियादी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में भी विफल रही है। इस स्थिति को सामान्य नहीं माना जा सकता और न ही इसे स्वीकार किया जा सकता है। एसएफ़आई ये मांग करती है :- * केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफ़ा दें। * राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त किया जाए। * परीक्षाओं का विकेंद्रीकरण किया जाए। * सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को रद्द किया जाए। * परीक्षा घोटालों और अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जाँच कराई जाए। * दोषियों के विरुद्ध राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना कठोर कार्रवाई की जाए। * प्रभावित विद्यार्थियों को उचित मुआवज़ा एवं राहत प्रदान की जाए। एसएफ़आई स्पष्ट करना चाहती है कि यह संघर्ष यहीं समाप्त नहीं होगा। इस देशव्यापी आंदोलन के अगले चरण के रूप में 19 जून 2026 को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय की ओर आयोजित मार्च में एसएफ़आई हिमाचल प्रदेश सक्रिय भागीदारी करेगी। इस मार्च के माध्यम से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और एनटीए को समाप्त करने की माँग को और बुलंद किया जाएगा। एसएफ़आई सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा लोकतांत्रिक चेतना रखने वाले नागरिकों से आह्वान करती है कि वे सार्वजनिक शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा के इस निर्णायक संघर्ष में सहभागी बनें।
स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई), हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने आज राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की लगातार विफलताओं और देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में उसकी अक्षमता के खिलाफ़ शिमला स्थित उपायुक्त कार्यालय के समीप एक उग्र एवं संघर्षपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन के दौरान एसएफ़आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियाँ देकर अपना विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी आज देश के करोड़ों विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक अक्षमता, जवाबदेही के अभाव और छात्र हितों की घोर उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने की घटनाएँ, तकनीकी अव्यवस्थाएँ तथा अन्य अनियमितताओं ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन विफलताओं का खामियाज़ा देशभर के लाखों विद्यार्थियों ने भुगता है और हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थी भी इससे अछूते नहीं रहे हैं।
नीट-यूजी पेपर लीक, यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने की घटनाएँ, सीयूईटी तथा अन्य परीक्षाओं से जुड़ी लगातार अनियमितताओं ने भारत की परीक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरे संकट को उजागर कर दिया है। हर रद्द हुई परीक्षा, हर पेपर लीक और हर तकनीकी विफलता के पीछे लाखों विद्यार्थियों के सपने, वर्षों की मेहनत और उनका भविष्य दाँव पर लगा हुआ है। बार-बार की विफलताओं के बावजूद एनटीए का अस्तित्व बनाए रखना केंद्र सरकार की छात्र समुदाय के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।यह संकट किसी एक परीक्षा या एक वर्ष तक सीमित नहीं है। पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक और 48 पुनर्परीक्षाओं की घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिसने करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में धकेल दिया है। हाल ही में नीट-यूजी 2026 से जुड़े विवादों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। इसके अतिरिक्त, जून 2024 में यूजीसी-नेट परीक्षा को आयोजित होने के मात्र एक दिन बाद रद्द करना पड़ा, जिससे 9 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। यह स्वयं शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकार किया गया था कि परीक्षा की "इंटीग्रिटी" से समझौता होने की आशंका है। ऐसी घटनाएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विद्यार्थियों को एक विश्वसनीय, पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने में विफल रही है।
एसएफ़आई केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की कड़ी निंदा करती है। शिक्षा मंत्रालय विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहा है। समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार ने लगातार अपनी जिम्मेदारी से बचने और विद्यार्थियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है।
एसएफ़आई ने अपने स्थापना काल से ही शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों, सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा तथा छात्रों के हितों पर हो रहे नवउदारवादी हमलों के विरुद्ध लगातार संघर्ष किया है। फीस वृद्धि, शिक्षा के निजीकरण, सार्वजनिक निवेश में कटौती, छात्र संघों पर हमले अथवा परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं, हर मुद्दे पर एसएफ़आई ने छात्रों की आवाज़ बुलंद की है। आज का यह प्रदर्शन उसी संघर्षशील विरासत और सार्वजनिक शिक्षा के प्रति हमारी अडिग प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
NTA से जुड़ा यह संकट कोई साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाला एक विशाल राष्ट्रीय संकट है। ऐसे समय में जब छात्र पहले से ही कठिन प्रतिस्पर्धा और बढ़ते आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं, सरकार परीक्षा प्रणाली की बुनियादी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में भी विफल रही है। इस स्थिति को सामान्य नहीं माना जा सकता और न ही इसे स्वीकार किया जा सकता है।
एसएफ़आई ये मांग * केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफ़ा दें। * राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त किया जाए।
* परीक्षाओं का विकेंद्रीकरण किया जाए। * सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को रद्द किया जाए। * परीक्षा घोटालों और अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जाँच कराई जाए। * दोषियों के विरुद्ध राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना कठोर कार्रवाई की जाए। * प्रभावित विद्यार्थियों को उचित मुआवज़ा एवं राहत प्रदान की जाए।
एसएफ़आई स्पष्ट करना चाहती है कि यह संघर्ष यहीं समाप्त नहीं होगा। इस देशव्यापी आंदोलन के अगले चरण के रूप में 19 जून 2026 को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय की ओर आयोजित मार्च में एसएफ़आई हिमाचल प्रदेश सक्रिय भागीदारी करेगी। इस मार्च के माध्यम से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और एनटीए को समाप्त करने की माँग को और बुलंद किया जाएगा।
एसएफ़आई सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा लोकतांत्रिक चेतना रखने वाले नागरिकों से आह्वान करती है कि वे सार्वजनिक शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा के इस निर्णायक संघर्ष में सहभागी बनें।
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