आंजभोज के धनला गाँव में उमड़ा आस्था का सैलाब, शांत महायज्ञ में हजारों लोगों ने लिया हिस्सा
सिरमौर जिला के आंजभोज क्षेत्र के धनला गांव में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां आयोजित शांत महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दरअसल यहां सदियों से विराजमान शिरगुल देवता और विजट महाराज के नए मंदिर का निर्माण किया गया
यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन 17 जून, 2026 :
सिरमौर जिला के आंजभोज क्षेत्र के धनला गांव में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां आयोजित शांत महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दरअसल यहां सदियों से विराजमान शिरगुल देवता और विजट महाराज के नए मंदिर का निर्माण किया गया और इसी उपलक्ष्य पर यहां शांत महायज्ञ आयोजित हुआ। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से देवताओं की छड़ियां भी धनला पहुंचीं। आज नए मंदिर में शिरगुल महाराज और विजट महाराज की विधिवत प्रतिष्ठा की गई। हजारों लोग इस ऐतिहासिक और धार्मिक पल के साक्षी बने।
आंज भोज के धनला गांव में आयोजित शांत महायज्ञ के अवसर पर पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आया। धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि कई सदियों के बाद यहां विजट महाराज और शिरगुल के नए मंदिर का निर्माण हुआ है और इस उपलक्ष पर शांत महायज्ञ का आयोजन हुआ जिसके लिए पिछले लंबे समय से तैयारी चल रही थी।
लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से लगातार यहां पर धार्मिक कार्यक्रम चल रहे थे साथ ही यह क्षेत्र में एकमात्र ऐसा धार्मिक स्थल है जहां शिरगुल और विजट महाराज दोनों ही विराजमान है। लोगों ने बताया कि शांत महायज्ञ के दौरान क्षेत्र के कई गांव के देवी देवताओं को भी धनवा गांव में आमंत्रित की गई थी और लोगों को एक साथ कई देवताओं के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। जिला सिरमौर के धनला गांव में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां आयोजित शांत महायज्ञ में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।
बताते है कि जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के आंज भोज के धनला में शांत महायज्ञ में न केवल जिला सिरमौर , बल्कि शिमला और उत्तरांचल से भी हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। गौर हो कि धनला स्थित गांव में शिरगुल महाराज और बिजट महाराज का संयुक्त मंदिर है। जहां पर शांत महायज्ञ आयोजित किया गया। मंगलवार को शिमला जिला के सराहा से बिजट महाराज के मूल स्थान से देव छड़ी धनला पहुंची , जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सराहा से लेकर धनला तक हाजिरी दी। धनला में बिजट महाराज और शिरगुल महाराज का प्राचीन मंदिर है।
बताते हैं कि आदिकाल में बिजट महाराज की भेड़ बकरियां धनला नामक स्थान पर रहती थी और यहां बिजट महाराज की बहुत बड़ी चारागाह हुआ करती थी। अब इस स्थान पर शिरगुल और बिजट महाराज का संयुक्त मंदिर है। इस शांत महायज्ञ में जहां 10 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्र उच्चारण के साथ शांत महायज्ञ के अंतिम दिन मंदिर में कुरुड़ स्थापित किया गया। इस दौरान आस्था का इस संगम देखने को मिला ही हर एक इंसान देव आस्था में डूबा नजर आया। इस दौरान मंदिर कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने की उचित व्यवस्था की गई थी।
लोगों का कहना है कि एक सप्ताह तक लगातार यहां पर धार्मिक कार्यक्रम चल रहे थे। यह क्षेत्र एक मात्र ऐसा धार्मिक स्थल है जहां पर बिजट और शिरगुल महाराज दोनों ही विराजमान है। स्थानीय लोगों ने बताया कि शांत महायज्ञ के दौरान आसपास के अन्य गांव से भी देवी देवताओं की छड़िया धनला गांव में पहुंची। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंगलवार देर शाम को जब शिमला के सराहा से बिजट महाराज की छड़ी का आगमन हुआ। उस दौरान माहौल भक्ति में हो गया। पूरा क्षेत्र शिरगुल और बिजट महाराज की जय कारों से गूंज उठा। मंदिर कमेटी द्वारा वाहनों की पार्किंग की उचित व्यवस्था की गई थी। वाहनों के लिए चारों तरफ पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इस दौरान जहां पूर्व सैनिक संगठन ने अपनी सेवाएं दी। वहीं हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान भी मुस्तैद नजर आए। दो दिनों तक के इस शांत महायज्ञ में नघेता और आसपास के गांव की बेटियां पारंपरिक परिधानों में नजर आई जिस माहौल अद्भुत देखने को मिल रहा था। धनला में पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के बीच देव परंपरा की भव्य झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया।
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