नई दुग्ध क्रांति में अहम भूमिका निभाएगा दत्तनगर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र  

शिमला के रामपुर उपमंडल में नवनिर्मित दत्तनगर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र नई दुग्ध क्रांति में अहम भूमिका निभाएगा। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस 50000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन किया

Dec 1, 2024 - 15:07
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नई दुग्ध क्रांति में अहम भूमिका निभाएगा दत्तनगर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला     01-12-2024

शिमला के रामपुर उपमंडल में नवनिर्मित दत्तनगर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र नई दुग्ध क्रांति में अहम भूमिका निभाएगा। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस 50000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन किया है। उल्लेखनीय है कि दत्तनगर में पहले से 20000 लीटर क्षमता का दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र और 5 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता का एक पाउडर प्लांट 2012 से क्रियाशील है और इस नए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र के बनने से दत्तनगर में कुल 70000 लीटर प्रतिदिन की क्षमता हो गई है। 

दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र दत्तनगर में 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता को क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों के लाभ के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और हिम गंगा योजना के तहत 25.67 करोड रुपये की लागत से बनाया गया है, जिससे इस क्षेत्र के अधिक से अधिक किसानों व दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा जा सकेगा और लाभ पहुँचाया जायेगा। 

यह संयंत्र दूध, घी, मक्खन, पनीर, लस्सी और फ्लेवर्ड मिल्क का उत्पादन करेगा। संयंत्र के बनने से न केवल क्षेत्र में दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा बल्कि क्षेत्र में युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। हिमाचल प्रदेश दुग्ध उत्पादक प्रसंघ चार जिलों यानि शिमला, कुल्लू, मण्डी और किन्नौर से दूध एकत्र कर रहा है। 

2012 के दौरान इन क्षेत्रों में दुग्ध संग्रह मात्र 25000 से 26000 प्रतिदिन था, जो आज की तारीख में बढ़कर 1.00 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है, जिसमें 95 प्रतिशत दूध कुल्लू क्षेत्र से एकत्रित किया जा रहा है। प्रसंघ किन्नौर के चांगो तक दूर-दराज के इलाकों से यहा दूध एकत्र कर रहा है। 

हिमाचल प्रदेश दुग्ध उत्पादक प्रसंघ 1980 में पंजीकृत किया गया था, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर, सिरमौर, सोलन और शिमला जिलों के कुछ हिस्सों में डेयरी विकास गतिविधियों को स्थानांतरित करने के बाद 02 अक्टूबर 1983 से प्रसंघ का प्रभावी ढंग से संचालन शुरू किया गया। 

उल्लेखनीय है कि जुलाई 1992 से हिमाचल प्रदेश के शेष हिस्सों की दुग्ध आपूर्ति योजनाओं को दुग्ध प्रसंघ में हस्तांतरित कर दिया गया था। इसके संचालन के लिए, राज्य को प्रसंघ द्वारा तीन इकाइयों कांगड़ा, मंडी और शिमला में विभाजित किया गया है। 

कांगड़ा इकाई के संचालन का क्षेत्र चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना जिला में है जबकि मंडी इकाई के संचालन का क्षेत्र बिलासपुर, कुल्लू और मंडी जिला में है। इसी प्रकार, शिमला इकाई के संचालन का क्षेत्र शिमला, सिरमौर, सोलन और कुल्लू जिला में है। हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ द्वारा डेयरी विकास कार्यक्रमों में अपनी गतिविधियां प्रदेश के 11 जिलों (लाहौल स्पीति जिला को छोड़कर) में चलाई जा रही हैं। 

वर्ष 2023-24 के दौरान प्रसंघ ने 47905 से अधिक की सदस्यता वाले 1148 ग्राम डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन औसतन लगभग 1,70,000 लीटर दूध की खरीद की। एक ही दिन में अधिकतम खरीद 2.00 लाख लीटर दर्ज की गई है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ के अंतर्गत 11 दुग्ध विधायन संयंत्र कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,30,000 लीटर प्रति दिन है। 

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि दत्तनगर दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र न केवल रामपुर क्षेत्र बल्कि साथ लगते जिला कुल्लू, मंडी और किन्नौर के दुग्ध उत्पादकों को लाभान्वित करेगा। जहाँ एक ओर प्रदेश सरकार द्वारा दूध के दाम बढ़ाए जाने से दुग्ध उत्पादक को अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है, वहीँ दूसरी ओर युवाओं को दुग्ध क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। 

इस संयंत्र के बनने से दूसरे राज्यों से आने वाले दूध और दूध उत्पादों पर प्रदेश की निर्भरता कम होगी और इसका सीधा लाभ प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को होगा। दूध के बेहतर दाम मिलने से लोग अपनी गायों को निराश्रित सड़कों पर नहीं छोड़ेंगे जिससे सड़क पर होने वाले हादसों में कमी देखने को मिलेगी।

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