न्यूनतम वेतन की मांग को ले कर तीन दिसंबर को दिल्ली में गरजेंगे मिड डे मील वर्करज

मिड डे मील वर्करज संबंधित सीटू नाहन ब्लॉक की बैठक ब्लॉक अध्यक्ष संदीप की अध्यक्षता में की गई। बैठक मे नाहन  ब्लॉक से 3 दर्जन के करीब लोगों ने भाग लिया। बैठक में मिड डे मील यूनियन की जिला महासचिव निर्मला और सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन की जिला महासचिव निर्मला और अध्यक्ष संदीप ने कहा कि आज प्रदेश का मिड डे  मील वर्कर का केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की सरकार लगातार शोषण कर रही है

Nov 18, 2024 - 18:06
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न्यूनतम वेतन की मांग को ले कर तीन दिसंबर को दिल्ली में गरजेंगे मिड डे मील वर्करज
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  18-11-2024

मिड डे मील वर्करज संबंधित सीटू नाहन ब्लॉक की बैठक ब्लॉक अध्यक्ष संदीप की अध्यक्षता में की गई। बैठक मे नाहन  ब्लॉक से 3 दर्जन के करीब लोगों ने भाग लिया। बैठक में मिड डे मील यूनियन की जिला महासचिव निर्मला और सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन की जिला महासचिव निर्मला और अध्यक्ष संदीप ने कहा कि आज प्रदेश का मिड डे  मील वर्कर का केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की सरकार लगातार शोषण कर रही है । बैठक में मिड डे मील वर्करज की स्थाई नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की मांग और 2013 में दिल्ली में आयोजित 45वें श्रम सम्मेलन के अनुसार इनको स्थाई कर्मचारी बनाने का जो दावा किया था , लेकिन वे आज तक कागजों में ही सीमित हो गया। 
सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। आशीष कुमार ने कहा कि सरकार में महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है लेकिन हकीकत इससे बहुत दूर है। मिड डे मील कर्मियों को सबसे कम मानदेय मिलता है। आशीष कुमार ने कहा की यूनियन को न्यायलय ने 10 महिने के बजाय 12 महीने वेतन देने का आदेश दिया था , मगर पहले जयराम सरकार और बाद में प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने इसे वर्करज को ना देने में अपनी रुचि दिखाई , जोकि  प्रदेश में सबसे कम वेतन पर काम करने वाले वर्ग के प्रति उनका नजरिया दिखाता है। आज बैठक में यूनियन स्तर पर ये निर्णय लिया गया की 3 दिसंबर को दिल्ली में जिला सिरमौर से भी सेंकड़ों की संख्या में मिड डे मील वर्करज सीटू के बैनर तले इस रैली में भाग लेंगे। 
रैली में मुख्य मिड डे मील कर्मियों को न्यूनतम वेतन , रसोइयों को उचित और न्यूनतम वेतन का प्रावधान किया जाए। 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन दिया जाए। प्रतिमाह 1 से 7 तारीख के बीच नियमित रूप से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन के अनुसार सभी वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सभी वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ लागू किया जाए। मिड-डे मील की योजना में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं होना चाहिए और न ही केंद्रीय किचन की प्रणाली लागू की जानी चाहिए। वर्करों की छंटनी पर रोक लगाई जाए।

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