फलों के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में हिमाचल प्रदेश की स्थिति जम्मू-कश्मीर से काफी पीछे
फलों के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में हिमाचल प्रदेश की स्थिति जम्मू-कश्मीर से काफी पीछे है। उत्पादकता दर की बात करें तो यह जम्मू-कश्मीर में 9.32 टन प्रति हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश में 3.70 टन प्रति हेक्टेयर
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 11-04-2026
फलों के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में हिमाचल प्रदेश की स्थिति जम्मू-कश्मीर से काफी पीछे है। उत्पादकता दर की बात करें तो यह जम्मू-कश्मीर में 9.32 टन प्रति हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश में 3.70 टन प्रति हेक्टेयर है। यह अध्ययन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत कार्यरत केंद्रीय शीतोष्ण कटिबंधीय बागवानी संस्थान श्रीनगर ने किया है।
डॉ. एमके वर्मा की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की इस टीम के वैज्ञानिक अध्ययन में आधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव दिया गया है। यह रिसर्च पेपर एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों का यह शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र 95 जिलों में फैला हुआ है।
यह भारत के भौगोलिक क्षेत्र के 16.2 प्रतिशत क्षेत्र को कवर करता है। इनमें बर्फ से ढकी पहाड़ियां, ग्लेशियर और घने वन भी शामिल हैं। इस क्षेत्र में जहां शीतोष्ण कटिबंधीय फसलें ज्यादा होती हैं, उनमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं।
शीतोष्ण फलों में प्रमुख फसलें सेब, नाशपाती, आडूृ, प्लम, एप्रिकॉट, चेरी, नट्स में बादाम, अखरोट, हेजलनट, पीकन, बैरीज स्ट्रॉबैरी, ब्लैकबैरी, ब्लूबैरी और अन्य फलों में कीवी, पर्सिमन, अंजीर, जैतून आदि हैं। अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में कुल फल उत्पादन में सेब का हिस्सा 76.11 प्रतिशत है।
हिमालय शीतोष्ण कटिबंधीय फल उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की 73 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश की 15.75 प्रतिशत, उत्तराखंड की 5.94 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश की 0.44 प्रतिशत और पंजाब की 5.42 प्रतिशत भूमिका है। इस हिसाब से जम्मू-कश्मीर को मार्केट लीडर के रूप में दर्शाया गया है। इस राज्य में उत्पादकता दर 9.32 टन प्रति हेक्टेयर है।
अध्ययन के अनुसार इसी क्षेत्र में शामिल किया गया पंजाब एफिशियेंसी बेंच मार्क राज्य है। इसकी सर्वाधिक उत्पादकता 25.25 टन प्रति हेक्टेयर है। यह 1.8 प्रतिशत भूमि पर 5.4 प्रतिशत उत्पादन कर रहा है। दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र यानी 30 प्रतिशत होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश फलों की उत्पादकता में 15.8 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
इसकी कम उत्पादकता दर 3.70 टन प्रति हेक्टेयर बगीचों के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यकता को दर्शाता है। हिमालयन बेल्ट से बाहर तमिलनाडु और हरियाणा ने 14 टन प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।
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