वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में पुलिस की बड़ी कार्रवाई,दो क्लर्कों और चार एजेंट गिरफ्तार
क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में हुए फर्जीवाड़े में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो क्लर्कों और चार एजेंटों को गिरफ्तार किया
यंगवार्ता न्यूज़ - सोलन 04-04-2026
क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में हुए फर्जीवाड़े में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो क्लर्कों और चार एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इसमें सोलन के साथ-साथ बिलासपुर, मंडी, ऊना व कांगड़ा के आरोपी शामिल हैं। बिलासपुर का क्लर्क गौरव भारद्वाज मुख्य आरोपी है।
गौरव पर आरोप है कि उसने सोलन आरएलए में फर्जी आईडी तैयार की। उसी से पूरा लेनदेन हुआ। उसने चार एजेंट भी तैयार कर दिए थे, जो पैसों की उगाही करते थे और ग्राहकों को लाते थे। पुलिस ने मामले की जांच के लिए उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान के नेतृत्व में विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन किया।
जांच में तथ्य सामने आए कि उपरोक्त वाहनों का पंजीकरण निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। इसमें वाहनों का पंजीकरण बिना मोटर वाहन निरीक्षक के निरीक्षण से ही कर दिया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरएलए सोलन कार्यालय में कार्यरत क्लर्क जितेंद्र ठाकुर की आधिकारिक यूजर आईडी के अतिरिक्त जितेंथा एवं डॉ. पूनम (एसडीएम) के नाम से फर्जी यूजर आईडी तैयार की गई थीं।
इन फर्जी आईडी के माध्यम से वाहन पंजीकरण से संबंधित वेरिफिकेशन एवं अप्रूवल की प्रक्रियाएं अवैध रूप से पूर्ण की गईं। तकनीकी साक्ष्यों, जिनमें आईपी लॉग्स, ओटीपी रिकॉर्ड्स तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) एनालिसिस शामिल हैं, का गहन विश्लेषण किया गया। साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि उक्त आपराधिक गतिविधियों में आरएलए झंडूता में कार्यरत क्लर्क गौरव मुख्य रूप से संलिप्त है।
आरोपी ने आरएलए सोलन के एडमिन क्रेडेंशियल को अवैध रूप से प्राप्त कर वाहन पोर्टल में अनधिकृत प्रवेश किया और फर्जी यूजर आईडी तैयार की और वाहनों की वेरिफिकेशन एवं अप्रूवल की प्रक्रियाओं को अवैध रूप से निष्पादित किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि गौरव ने इस अवैध कार्य को संगठित तरीके से अंजाम देने के लिए विभिन्न एजेंटों का नेटवर्क तैयार किया हुआ था।
इन एजेंटों में राजकुमार, विकास सिंह, जितेंद्र और अनिल आदि शामिल हैं। उनके माध्यम से वाहन मालिकों से अवैध धनराशि वसूली जाती थी। इसके बदले वाहन मालिकों के दस्तावेजों में हेराफेरी की जाती थी। इसमें वाहनों का वजन बढ़ाना, ऑनर सीरियल नंबर में परिवर्तन करना, बैंक का नाम हटाना और बिना निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के पंजीकरण एवं स्वामित्व स्थानांतरण करना शामिल है। जांच में पाया गया कि गौरव के खातों में विभिन्न व्यक्तियों एवं एजेंटों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
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