धौलाकुआं में लीची एवं आम दिवस का आयोजन, उन्नत तकनीकों एवं किसान-वैज्ञानिक सहयोग पर दिया बल

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं में शुक्रवार को लीची एवं आम दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को इन महत्वपूर्ण फलों की नवीनतम उत्पादन तकनीकों, उन्नत किस्मों तथा कटाई उपरांत प्रबंधन संबंधी जानकारी प्रदान करना था

Jun 19, 2026 - 20:04
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धौलाकुआं में लीची एवं आम दिवस का आयोजन, उन्नत तकनीकों एवं किसान-वैज्ञानिक सहयोग पर दिया बल

यंगवार्ता न्यूज धौलाकुआं, 19 जून, 2026: 

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालयनौणी के अधीन क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं में शुक्रवार को लीची एवं आम दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को इन महत्वपूर्ण फलों की नवीनतम उत्पादन तकनीकोंउन्नत किस्मों तथा कटाई उपरांत प्रबंधन संबंधी जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम में किसानोंवैज्ञानिकों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहेजबकि अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य तथा विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डी.पी. शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए धौलाकुआं केंद्र की सह डायरेक्टर डॉ. प्रियंका ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों एवं कटाई उपरांत प्रबंधन के बारे में जागरूक कर उनकी उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाना है।

अपने संबोधन में प्रो. बवेजा ने हिमाचल प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों में आम और लीची की खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इन्हें किसानों की आय बढ़ाने वाली फसलें बताया। उन्होंने अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक बाग प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सिट्रस फलों के बागों की उत्पादकता एवं लाभप्रदता अनुसंधान और प्रसार का प्राथमिक क्षेत्र होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने किसानों के साथ मजबूत सहयोग तथा किसानों के खेतों पर सहभागी अनुसंधान परीक्षणों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दियाजिससे स्थानीय समस्याओं के समाधान और नई तकनीकों को अपनाने में सहायता मिल सके।

बाजार से जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रो. बवेजा ने कृषि उपज मंडी समितियों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमोंप्रदर्शनियों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने का सुझाव दियाताकि किसानों को बाजार की आवश्यकताओंगुणवत्ता मानकोंग्रेडिंगपैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की बेहतर जानकारी मिल सके। उन्होंने धौलाकुआं में बागवानी जर्मप्लाज्म के संरक्षण हेतु एक जीन बैंक स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा ड्रैगन फ्रूटएवोकाडो और स्ट्रॉबेरी जैसी उभरती हुई उच्च मूल्य वाली फल फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

प्रो. बवेजा ने केंद्र परिसर में प्रस्तावित नेचर पार्क की आधारशिला भी रखी। यह पार्क जैव विविधता संरक्षणपर्यावरण शिक्षा और वैज्ञानिक अध्ययन का केंद्र बनने के साथ-साथ विद्यार्थियोंशोधार्थियों और स्थानीय समुदाय के लिए एक मनोरंजक स्थल के रूप में भी कार्य करेगा।

डॉ. देविना वैद्य ने राज्य के बागवानी विकास में धौलाकुआं केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिकाविशेषकर सिट्रस फल अनुसंधान एवं किन्नू उत्पादन को बढ़ावा देने में इसके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने सिट्रस बागों की गिरती उत्पादकता के कारणों की पहचान के लिए व्यवस्थित अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. डी.पी. शर्मा ने बेहतर आर्थिक लाभ के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जिले की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए अवसरों का उल्लेख किया और सिरमौर जिले में लहसुन उत्पादनमूल्य संवर्धनब्रांडिंग तथा बेमौसमी सब्जियों की खेती की व्यापक संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।

इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों भूरा रामजगीर चंदनिर्मलप्रिंस और अक्षित को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद भी आयोजित किया गयाजिसमें विशेषज्ञों ने उन्नत किस्मोंकीट एवं रोग प्रबंधनकैनोपी प्रबंधन तथा कटाई उपरांत प्रबंधन संबंधी जानकारी साझा कीजबकि किसानों ने फल उत्पादन से जुड़े अपने अनुभवों और समस्याओं पर चर्चा की।

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