यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 19-01-2026
मशोबरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सतलाई के वार्ड ठूंड में इन दिनों कशमल की जड़ों का बड़े पैमाने पर दोहन हो रहा है। ठेकेदार की लेबर ठूंड में टैंट लगाकर डेरा जमाए हुए हैं और मजदूरों को एक किवंटल कशमल की जड़ों को उखाड़ने के एवज एक हजार रूपये मेहनताना दिया जा रहा है। सैंकड़ों टन के हिसाब से जंगली वनस्पति का दोहन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक दस वर्षों उपरांत किसानों को अपने मलकीयत से पेड़ पौधे काटने व बेचने की वन विभाग द्वारा अनुमति दी जाती है जिससे किसानों की आय काफी हो जाती है। जिस तरह कशमल की जड़ों का बड़े पैमाने पर दोहन हो रहा है।
उससे भविष्य में जंगली पौधे हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे। निजी मलकियत की बजाए सरकारी भूमि से कशमल के पौधों का उखाड़ा जा रहा है। अनके बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि जिस प्रकार जंगली फलदार पौधे नष्ट हो रहे है उसी वजह से जंगली जानवर का रिहायशी क्षेत्रों में आना शुरू हो गया है। दूसरी ओर पेड़ पौधों के उखाड़ने से पर्यावरण भी प्रभावित होगा। गौर रहे कि कशमल एक झाड़ीनुमा पौधा है जो प्राकृतक रूप से जंगल में स्वयं उगता है। इसकी ऊंचाई 4-5 मीटर होती है। इसमें नीले रंग के छोटे छोटे फल के दाने लगते हैं जो कि आयरन से भरपूर होते हैं। कशमल के फलों को इंसान के अलावा बंदर व अन्य जानवर खाते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ0 विश्वबंधु जोशी ने बताया कि कशमल एक औषधियुक्त पौधा है जिसका वनस्पति नाम बरबैरीज है। कशमल से आंखो की दवा रसौंत बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त इसकी जड़े मधुमेह , पीलिया व बावासीर रोग में काफी लाभदायक होती है। खुले बाजार में कशमल की जड़ों की काफी मांग है और किसानों को अच्छी आय हो जाती है। संबधित बीट के फोरेस्ट गार्ड लब्बूराम ने बताया कि सिरमौर के ठेकेदार संजीव कंवर कशमल की जड़ें खरीद रहे हैं। आगामी 31 मार्च तक विभाग ने निजी भूमि से कशमल की जड़ों को निकालने की अनुमति दी है। यदि सरकारी भूमि से दोहन किया जाता है तो ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।