किन्नौर की संस्कृति , बोली और साहित्य को बचाने का करें साझा प्रयास : अनुराग सिंह ठाकुर

पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने दिल्ली में दिल्ली किन्नौर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ( DKSA ) के वार्षिक कार्यक्रम तोशिम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर किन्नौर की किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य पर अपने विचार रख इसे सहेजने व प्रचारित प्रसारित करने के साझा प्रयासों पर ज़ोर दिया। 

Mar 1, 2026 - 18:57
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किन्नौर की संस्कृति , बोली और साहित्य को बचाने का करें साझा प्रयास : अनुराग सिंह ठाकुर
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यंगवार्ता न्यूज़ - रिकंगपीओ  01-03-2026
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने दिल्ली में दिल्ली किन्नौर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ( DKSA ) के वार्षिक कार्यक्रम तोशिम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर किन्नौर की किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य पर अपने विचार रख इसे सहेजने व प्रचारित प्रसारित करने के साझा प्रयासों पर ज़ोर दिया। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि किन्नौर की संस्कृति, इतिहास, वेशभूषा पूरी दुनिया में सराही जाती है। यदि हिमाचल देवभूमि है तो किनौर देवभूमि हिमाचल का मणि मुकुट है। आपसी समन्वय को बढ़ाने का तोशिम नाम नाम से यह कार्यक्रम पिछले चार दशक से अधिक समय से चल रहा है। किन्नौर में सिर्फ सेब ही नहीं उगते हैं किन्नौर में भारत की सबसे पुरानी और समृद्ध सभ्यता और संस्कृति भी पलती है। 
हम सभी को देवभूमि हिमाचल का निवासी होने का गौरव प्राप्त है , लेकिन एक हिमाचली के साथ किन्नौरी होना अपने आप में गर्व का विषय है। दिल्ली किन्नौर स्टूडेंट्स एसोसिएशन भाषा संस्कृति के संरक्षण के साथ साथ किन्नौर के युवाओं का सशक्तिकरण भी कर रहा है। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है की हम अपने इन युवाओं के प्रयासों को अपना बल प्रदान करें। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा केंद्र सरकार के Vibrant Villages Programme (VVP) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के 75 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया था जिसमें से 55 गाँव किन्नौर से हैं। इस योजना के तहत नाको और लिओ जैसे गांवों में टूरिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। Indo-Tibetan border पर बसा हुआ Chitkul गाँव Vibrant Villages  strategy का a focal point बन चुका है। देश पर लंबे समय तक राज करने वाले लोगों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे bordering villages के विषय में एक मानसिकता बना दी की यह देश के अंतिम गांव हैं। 
इस मानसिकता का यह असर हुआ की विकास की किरण सबसे अंत में और सबसे मद्धिम रूप में इन गाँवों में पहुँची और कभी कभी तो विल्कुल ही नहीं पहुँची। पहाड़ी राज्यों के सीमावर्ती गावों में यह विषमता तो और भी अधिक विकराल रही है। हमने उस मानसिकता को बदला है।आप भारत के अंतिम गाँव नहीं भारत के पहले गाँव हैं। भारत का अंत आपके गांव में नहीं होता है भारत का आरंभ आपके गांव से होता है। विकास की पहली किरण, विकास का पहला पैसा आपके लिए है ।2021 में जब किन्नौर में प्राकृतिक हादसा हुआ था तो केंद्र सरकार ने सबसे पहले respond किया था। 

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