पंचायती राज विभाग ने किया स्पष्ट,अब पंचायत स्तर पर किसी भी न्यायिक मामले की नहीं होगी सुनवाई
हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब पंचायत स्तर पर किसी भी न्यायिक मामले की सुनवाई नहीं होगी
यंगवार्ता न्यूज़ - कांगड़ा 03-03-2026
हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब पंचायत स्तर पर किसी भी न्यायिक मामले की सुनवाई नहीं होगी। ऐसे सभी प्रकरण संबंधित सक्षम न्यायालय अथवा मजिस्ट्रेट के पास भेजे जाएंगे।
पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार एक फरवरी 2026 से निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के सभी अधिकार समाप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही पंचायत न्यायालयों के माध्यम से होने वाली सुनवाई की व्यवस्था स्वतः खत्म हो गई है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और पंचायत सचिवों को न्यायिक शक्तियां प्रदान नहीं की गई हैं। उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित रहेगी। नई व्यवस्था के तहत न्यायिक प्रकृति के मामलों को संबंधित सक्षम न्यायालय या मजिस्ट्रेट को भेजना अनिवार्य होगा।
राजस्व संबंधी मामलों की सुनवाई तहसीलदार स्तर पर की जाएगी, जबकि फौजदारी, दीवानी एवं अन्य मामलों के निपटारे के लिए आवेदकों को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होना होगा।
इसी बीच पंचायत प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में आम लोगों के कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए चरित्र प्रमाण पत्र, निवास सत्यापन और अन्य आवश्यक रिपोर्ट ग्राम पंचायत के उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर बीडीओ और पंचायत सचिवों की ओर से गठित समिति द्वारा तैयार की जाएंगी।
खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार ने कहा कि राजस्व संबंधी मामलों की सुनवाई तहसीलदार स्तर पर की जाएगी, जबकि फौजदारी, दीवानी एवं अन्य न्यायिक मामलों के निपटारे के लिए आवेदकों को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष जाना होगा।
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