यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 17-03-2025
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम का कहना है कि हिमाचल सरकार का बजट मजदूरों कर्मचारियों की आकांक्षाओं के खिलाफ है। आत्मनिर्भर हिमाचल की बात करने वाले बजट में मजदूरों कर्मचारियों की काम चलाऊ बात करना और वह भी बजट पुस्तिका के अंतिम पन्नों में करना ही बजट की दिशा को बताता है। सरकार के एजेंडे से मजदूर कर्मचारी गायब हैं।
भारी महंगाई के दौर में मजदूरों की दिहाड़ी में केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी करना व इसे उपभोक्ता महंगाई सूचकांक के साथ न जोड़ना , मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में केवल 20 रुपए की बढ़ोतरी करना व उन्हें हिमाचल सरकार के न्यूनतम वेतन के दायरे में न लाना, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा कर्मियों के वेतन में केवल पांच सौ रुपए की बढ़ोतरी करना व माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनके लिए ग्रेच्युटी व न्यूनतम वेतन सुविधा लागू न करना, वाटर कैरियर, जल रक्षकों, मल्टी परपज़ वर्करज़, पैरा फिटर, पम्प ऑपरेटरों, चौकीदारों, राजस्व चौकीदारों, पंचायत वेटनरी असिस्टेंट के मासिक वेतन में भी मामूली बढ़ोतरी करना व उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन न देना उनके साथ क्रूर मज़ाक है।
आउटसोर्स कर्मियों, सिलाई अध्यापकों, एसएमसी अध्यापकों, आईटी टीचर्स व एसपीओ के वेतन में नाम मात्र बढ़ोतरी करना व उनके लिए सरकार द्वारा कोई ठोस नीति न बनाना बेहद चिंताजनक है। औद्योगिक मजदूरों की 40 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी, श्रम कानूनों की पालना, उनके एसओपी व सुरक्षा नियमों पर यह बजट खामोश है। निगमों व बोर्डों की ओपीएस बहाली पर खामोशी खलने वाली है व सरकार की दस गारंटियों की वादा खिलाफी है। यह बजट मजदूरों कर्मचारियों के दुखों का निवारण करने वाला बजट नहीं है।