चार दुर्लभ मॉनिटर लिज़ार्ड्स के साथ लोग लोग गिरफ्तार , वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

पांवटा साहिब के राजबन बीट धर दबोचे आरोपी  वन विभाग ने तीनों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया मामला  मॉनिटर लिज़ार्डस की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में रहती हे काफी मांग  कई प्रकार दवाइयोंइस्तेमाल होती है मॉनिटर छिपकलियां 

Jul 18, 2026 - 11:48
Jul 18, 2026 - 12:08
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चार दुर्लभ मॉनिटर लिज़ार्ड्स के साथ लोग लोग गिरफ्तार , वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
यंगवार्ता न्यूज़ - पांवटा साहिब  18-07-02026
सिरमौर जिला के पांवटा साहिब में वन विभाग की टीम ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को चार दुर्लभ मॉनिटर छिपकलियों (गो) के साथ गिरफ्तार किया है। वन अधिकारियों ने आरोपियों के कब्जे से एक सफेद प्लास्टिक की बोरी बरामद की , जिसमें चार मॉनिटर छिपकलियां रखी गई थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद मॉनिटर छिपकलियों के शरीर पर कुत्ते के काटने के निशान पाए गए हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि इन छिपकलियों को पकड़ने के लिए गुल टेरियर नस्ल के कुत्ते का इस्तेमाल किया गया , जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल वन्यजीवों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है। वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। 

आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे इन दुर्लभ जीवों को कहां से लाए थे और इन्हें किस नेटवर्क के माध्यम से आगे बेचने की तैयारी थी। वन अधिकारियों ने बताया कि मॉनिटर छिपकलियां अनुसूची-I (Schedule I) के अंतर्गत संरक्षित वन्य जीव हैं। इन्हें वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त है जो देश के सबसे अधिक संरक्षित वन्य जीवों को दी जाती है। इनके शिकार , अवैध कब्जे या तस्करी पर कानून के तहत कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। जानकारी के अनुसार मॉनिटर छिपकलियों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में काफी मांग रहती है। इनके चमड़े से विभिन्न प्रकार के लेदर उत्पाद बनाने के लिए इनका अवैध शिकार किया जाता है। इसके अलावा इनके शरीर के अंगों को लेकर कई अंधविश्वास भी फैले हुए हैं, जिनके कारण इनकी तस्करी होती है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी वन्यजीवों के शिकार या तस्करी की सूचना मिले तो तत्काल विभाग को सूचित करें। 
 
 
 
 
विभाग ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सहायक वन संरक्षक (पांवटा साहिब) आदित्य शर्मा ने बताया कि आरोपियों के पास भाले के अलावा एक कुत्ता ( गुल टेरियर ) भी था, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से शिकार और रखवाली के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि मॉनिटर छिपकलियों पर कुत्ते के काटने के निशान थे , जिससे पता चलता है कि उन्हें गुल टेरियर ने काटा था। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान गोल्डी , गुज्जर और अंजा के रूप में हुई है। गौर हो कि मॉनिटर छिपकलियां वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972  की अनुसूची I के अंतर्गत आती हैं, जो उन्हें पूरी सुरक्षा देती है, उनके अवैध शिकार पर सख्त रोक लगाती है और इसके लिए कड़ी कानूनी सजा का प्रावधान करती है। इस जब्ती की कार्रवाई ने न केवल वन विभाग की सतर्कता को दिखाया है, बल्कि पांवटा साहिब इलाके में बेईमान लोगों द्वारा संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों के अवैध व्यापार का भी पर्दाफाश किया है। 
 
 
 
 
वन अधिकारी इस मामले से जुड़े पिछले और आगे के संपर्कों की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 50 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच चल रही है। मॉनिटर छिपकलियों (गो) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में लेदर के सामान बनाने के लिए बहुत ज्यादा मांग है; इसके अलावा, स्थानीय पारंपरिक दवाओं और खाने (बुशमीट) में भी इनका इस्तेमाल होता है। इनकी मोटी खाल का इस्तेमाल फैशन एक्सेसरीज बनाने में किया जाता है, जबकि इनकी चर्बी और शरीर के अंगों की मांग अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं और कामोत्तेजक दवाओं में इस्तेमाल के लिए भी होती है।

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