प्रदेश हाईकोर्ट ने माननीयों के लिए शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड को पार्किंग जोन बनाए जाने पर सरकार से माँगा जवाब  

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने माननीयों के लिए शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड को पार्किंग जोन बनाए जाने पर सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई 11 नवंबर को निर्धारित की गई

Oct 18, 2025 - 15:36
Oct 18, 2025 - 16:11
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प्रदेश हाईकोर्ट ने माननीयों के लिए शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड को पार्किंग जोन बनाए जाने पर सरकार से माँगा जवाब  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    18-10-2025

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने माननीयों के लिए शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड को पार्किंग जोन बनाए जाने पर सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई 11 नवंबर को निर्धारित की गई है। शहर की सडक़ों के किनारे कूड़ा-कचरा पड़े रहने से शहर की खूबसूरती को दागदार बनाने से रोकने को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। 

इस याचिका में उठाए मुद्दों को विस्तार देते हुए मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ऐतिहासिक मॉल रोड पर खासकर रॉक सी होटल से होटल विलो बैंक तक के प्रतिबंधित हिस्से को पार्किंग स्थल बनाए जाने पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस संदर्भ में गृह सचिव सहित एसएसपी शिमला से जवाब तलब किया है। 

याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अब यह देखा जा रहा है कि रॉक सी होटल से विलो बैंक तक मॉल रोड के प्रतिबंधित हिस्से पर वाहन पार्क किए जा रहे हैं। कोर्ट को बताया गया कि यहां अकसर राज्यपाल कार्यालय के वाहनों सहित सासंद व विधायकों की गाडिय़ां पार्क रहती हैं। 

इस पर कोर्ट ने कहा कि भले ही वाहनों में उक्त स्थान तक अधिकृत व्यक्ति को ले जाने की अनुमति दी गई हो और इस बाबत भी पास जरूरी किया गया है, फिर भी क्या ऐसी अनुमति का उपयोग दिन या रात भर उक्त स्थान पर वाहनों को पार्क करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि इसे अधिकतम ड्रॉप जोन ही माना जा सकता है। कोर्ट को बताया गया कि शिल्ली चौक शिमला क्लब से छोटा शिमला चौक तक की सडक़ को सील्ड बताया गया है, लेकिन वाहनों के लिए बड़ी संख्या में पास जारी किए गए हैं, जिससे पैदल चलने वालों का स्वतंत्र रूप से चलना मुश्किल हो गया है। 

कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शिमला शहर अपना छतरी और जैकेट पहनकर पैदल चलने का अपना संस्कार और संस्कृति खो रहा है। कोर्ट ने शिमला जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस संबंध में स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने को कहा और हिमाचल प्रदेश सरकार के सचिव (गृह) को भी स्टेट्स रिपोर्ट पेश कर यह विवरण देने को कहा है कि सील्ड सडक़ों पर आवाजाही के लिए कितने वाहनों को सडक़ पास जारी किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि यह पास किस दर पर किस उद्देश्य से और किन लोगों के लिए जारी किए गए हैं।

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