फॉरेंसिक निदेशालय जुन्गा में दो दिवसीय फिंगर प्रिंट विज्ञान पर कार्यशाला आरंभ

फॉरेंसिक निदेशालय जुन्गा में फिंगर प्रिंट विज्ञान और नैफिस से सम्बन्धित दो दिवसीय कार्यशाला सोमवार को  आरंभ हुई ।  जिसका शुभारंभ  डॉ, मीनाक्षी महाजन, निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं ने किया। इस कार्यशाला में  हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से 14 पुलिस फिंगर प्रिंट एनरोलमेंट यूजर्स तथा राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के 03 फॉरेंसिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं

Jul 6, 2026 - 17:36
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फॉरेंसिक निदेशालय जुन्गा में दो दिवसीय फिंगर प्रिंट विज्ञान पर कार्यशाला आरंभ

यंगवार्ता न्यूज शिमला 06 जुलाई, 2026 : 


 फॉरेंसिक निदेशालय जुन्गा में फिंगर प्रिंट विज्ञान और नैफिस से सम्बन्धित दो दिवसीय कार्यशाला सोमवार को  आरंभ हुई ।  जिसका शुभारंभ  डॉ, मीनाक्षी महाजन, निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं ने किया। इस कार्यशाला में  हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से 14 पुलिस फिंगर प्रिंट एनरोलमेंट यूजर्स तथा राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के 03 फॉरेंसिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला में अतिथि शिक्षक के रूप में  निरीक्षक जतिन कुमार शर्मा, केन्द्रीय फिंगर चिन्ह/राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, भारत सरकार, प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण व व्याख्यान देंगे।


डॉ0 मीनाक्षी महाजन ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिला स्तर पर एनरोलमेंट यूजर्स को नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम (नैफिस) से सम्बन्धित समस्याओं व उनके निवारण से संबंधित व्यावहारिक व्  सैद्धांतिक जानकारी दी जाएगी।


 गौरतलब है कि आज के युग में फिंगरप्रिंट का महत्व बहुत बढ गया है क्योंकि आपराधिक घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और इन आपराधिक घटनाओं पर अंकुश  लगाने व अपराधियों की पहचान करने के लिए उसके फिंगर प्रिंट पुलिस अन्वेषण अधिकारी द्वारा लिए जाते है । जिला स्तर पर फिंगर प्रिंट नैफिस में अपलोड करते है तथा राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो,  जुन्गा को ऑनलाईन नैफिस सिस्टम के माध्यम से भेजे जाते हैं जहां पर नैफिस डेटाबेस में पूरे भारत वर्ष के अपराधियों का फिंगर प्रिंट रिकॉर्ड मौजूद है।


निरीक्षक जतिन कुमार शर्मा ने कहा कि अगर किसी भी अपराधी का पूर्व आपराधिक रिकार्ड नैफिस डेटाबेस में दर्ज है व उसके मिलान हो जाता है तो अपराधी की त्वरित पहचान सम्भव हो सकती है। पहले नैफिस की प्रणाली केंद्रीय अंगुली चिन्ह ब्यूरो/राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो, के साथ राष्ट्रीय स्तर पर समाहित नहीं थी लेकिन अब समाहित हो चुकी है। और अब फिंगर प्रिंट से अपराधियों की पहचान आसान हो चुकी है। नैफिस डेटाबेस की महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतर्राज्यीय अपराधियों की पहचान कुछ ही मिनटों में की जा सकती है।


डॉ, मीनाक्षी महाजन, निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं जुन्गा ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश में एनरोलमेंट यूजर्स के लिए पहली कार्यशाला है । ऐसी कार्यशाला के आयोजन से फिंगर प्रिंट डाटाबेस की गुणवत्ता को बढाने व आपराधिक पहचान दर में वृद्वि होगी ताकि फिंगर प्रिंटस से संबंधित आपराधिक घटनाओं का जल्दी से जल्दी पता लग सके व त्वरित कार्यवाही की जा सके।

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