भू-तापीय ऊर्जा के दोहन से हरित हिमाचल के लक्ष्य को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गत सायं शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ कार्य कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 22-01-2026
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गत सायं शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ कार्य कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अब राज्य सरकार भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य जल, सौर तथा भू-तापीय ऊर्जा के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे भू-तापीय विद्युत संयंत्र कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 24ग्7 विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह ऊर्जा शिमला, मनाली और केलांग जैसे शीत जलवायु वाले नगरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी, जहां सर्दियों में हीटिंग और गर्मियों में कूलिंग की निरंतर आवश्यकता रहती है।
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