यंगवार्ता न्यूज़ - सोलन 22-01-2026
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में 35 कफ सीरप सहित 174 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। फेल सैंपल में सबसे अधिक 51 दवाएं हिमाचल और 29 उत्तराखंड से पाई गई हैं। 174 दवाओं में से सात नकली पाई गई हैं। सीडीएससीओ के दिसंबर के ड्रग अलर्ट में दिल , कैंसर , मधुमेह , हाई बीपी , अस्थमा , संक्रमण , दर्द , सूजन , पेट के कीड़े , एनीमिया , मिर्गी , एसिडिटी , एलर्जी, सर्दी - जुकाम जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। हर माह देशभर की ड्रग टेस्टिंग लैब में दवाओं की गुणवत्ता को परखा जाता है, जिसमें इंजेक्शन, टैबलेट, सीरप, आई ड्राप व कैप्सूल शामिल हैं।
देशभर में हर माह हजारों दवाओं का परीक्षण होता है, जिनमें से कुछ फेल पाई जाती हैं। राज्य प्रयोगशाला के देश भर में 93 सैंपल फेल हुए हैं जिसमें हिमाचल के 51 सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए। वहीं, केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पास देशभर में बनी 174 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जिसमें हिमाचल के 19 सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए। देश में दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी रखने वाली शीर्ष नियामक संस्था सीडीएससीओ की दिसंबर माह की मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट के अनुसार ये दवा नमूने केंद्र और राज्य स्तरीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान फेल पाए गए। रिपोर्ट में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं द्वारा 74 और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा 93 दवा नमूनों को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया गया है। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित कुल 51 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें 31 दवाएं स्टेट ड्रग लैब की जांच में जबकि 20 दवाएं सीडीएससीओ की सेंट्रल व रीजनल लैब्स में फेल पाई गई हैं।
ये दवाएं बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, सोलन, संसारपुर टैरेस, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना स्थित उद्योगों में निर्मित बताई गई हैं। दिसंबर के ड्रग अलर्ट में सात दवा नमूनों को स्प्यूरीयस (नकली) पाया गया है। इनमें उत्तर क्षेत्र से चार गाजियाबाद से एकए एफडीए अहमदाबाद से एकए बिहार से एक तथा महाराष्ट्र से एक दवा नमूना शामिल है। इन दवाओं का निर्माण अनधिकृत निर्माताओं द्वारा अन्य कंपनियों के ब्रांड नामों का दुरुपयोग कर किया था। सभी मामलों में जांच जारी है। नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान हिमाचल में छह कफ.कोल्ड सिरप और अन्य तरल दवाएं भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें कंटेंट, पीएच और अन्य तकनीकी मानकों से जुड़ी गड़बडिय़ां सामने आई हैं।
कुछ इंजेक्शनों में पार्टिकुलेट मैटर, क्लैरिटी और डिस्क्रिप्शन से संबंधित खामियां दर्ज की गई हैं, जिन्हें मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। इस बारे में राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने कहा कि जिन दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं , उनसे संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि फेल पाए गए बैचों को बाजार से तुरंत रिकॉल करने के निर्देश दिए हैं और इन मामलों में विस्तृत जांच भी की जा रही है। राज्य दवा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।