बैसाख संक्रांति के उपलक्ष्य पर मिनी हरिद्वार जवाली में हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी  

बैसाख संक्रांति के उपलक्ष्य पर मिनी हरिद्वार जवाली में हजारों की तादाद में दूरदराज से आकर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। रविवार सुबह 4 बजे ही दूरदराज से लोगों का वाहनों के माध्यम से आवगन होना शुरू हो गया तथा लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा से स्नान किया

Apr 13, 2025 - 15:15
Apr 13, 2025 - 15:39
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बैसाख संक्रांति के उपलक्ष्य पर मिनी हरिद्वार जवाली में हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी  
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यंगवार्ता न्यूज़ - जवाली    13-04-2025

बैसाख संक्रांति के उपलक्ष्य पर मिनी हरिद्वार जवाली में हजारों की तादाद में दूरदराज से आकर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। रविवार सुबह 4 बजे ही दूरदराज से लोगों का वाहनों के माध्यम से आवगन होना शुरू हो गया तथा लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा से स्नान किया। इसके बाद लगातार लोगों का हुजूम बढ़ता गया तथा सूर्य की किरण निकलने तक मिनी हरिद्वार में पैदल चलने को जगह नहीं बची। 

देर शाम तक नहाने वालों का आगमन होता रहा। तकरीबन 60 हजार लोगों ने मिनी हरिद्वार जवाली के सरोबर में स्नान किया। पुलिस बल भी सुबह 4 बजे ही ड्यूटी पर तैनात हो गया। पुलिस बल ने किसी भी व्यक्ति को पुल पर खड़ा नहीं होने दिया। वाहनों को भी चिन्हित स्थानों पर ही खड़ा करवाया गया। 

जिला स्तरीय बैसाखी मेला कमेटी जवाली तथा प्रशासन द्वारा महिलाओं के स्नान के लिए टैंटनुमा स्नानागार बनाए गए थे। नहाने के लिए आए लोगों ने खूब खरीददारी की तथा बच्चों ने झूले झूलने व मिठाई-आइसक्रीम व कुल्फी खाने का खूब लुत्फ उठाया।

कहा जाता है कि मिनी हरिद्वार का निर्माण पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान किया गया था। कहा जाता है कि यहां पर भीम ने कुदाला मारा था तथा कुदाल के साथ जो मिट्टी रह गई थी उसे भीम ने झकझोर कर मारा जोकि पास ही टिल्ला के रूप में बन गया जिसे भीम टिल्ला कहा जाता है। यहां पर अढ़ाई पौढियां भी निकली थीं तथा एक कुआं भी था। 

कहा जाता है कि कुआं से होकर रास्ता पाताल को जाता था जोकि अब गाद इत्यादि से भर चुका है। देखरेख की अभाव में पौढियां दरिया के पानी में बह चुकी हैं। मिनी हरिद्वार जवाली का अस्तित्व खतरे में है। कोई भी राजनेता इस स्थल के अस्तित्व को बचाने की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।

जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि मिनी हरिद्वार में स्नान करने से हरिद्वार में नहाने तुल्य पुण्य मिलता है। उन्होंने कहा कि जो लोग हरिद्वार में स्नान करने नहीं जा सकते हैं वो मिनी हरिद्वार जवाली में स्नान करके पुण्य कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिनी हरिद्वार जवाली को विकसित किया जाना चाहिए। मिनी हरिद्वार जवाली में अस्थि विसर्जन घाट का निर्माण होना चाहिए।

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