ऊना में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, जिला स्तरीय कार्यक्रम में विधायक ने 39 किसानों को वितरित की 25.83 लाख की एमएसपी राशि

कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है और इसे कृषि में क्रांति की तरह आगे बढ़ाना होगा। वे गुरुवार को आत्मा परियोजना के तत्वावधान में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम

Aug 14, 2025 - 16:09
Aug 14, 2025 - 17:07
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ऊना में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, जिला स्तरीय कार्यक्रम में विधायक ने 39 किसानों को वितरित की 25.83 लाख की एमएसपी राशि
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बोले...किसान रसायन-मुक्त खेती अपनाएं, सरकार हर कदम पर साथ

यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना    14-08-2025

कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है और इसे कृषि में क्रांति की तरह आगे बढ़ाना होगा। वे गुरुवार को आत्मा परियोजना के तत्वावधान में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

इस कार्यक्रम में ऊना जिले के सभी पांच विकास खंडों के लाभार्थी 39 किसानों को प्राकृतिक गेहूं की सरकारी खरीद पर कुल 25.83 लाख रुपये की एमएसपी (न्यमतम समर्थन मूल्य) राशि वितरित की गई। विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू किसानों की पीड़ा को भलीभांति समझते हैं और उनके हित में ठोस कदम उठा रहे हैं। 

प्राकृतिक गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलो और मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलो एमएसपी तय करना, साथ ही 2 रुपये प्रति किलो की दर से परिवहन भत्ता देना, इसका स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह फैसले  किसानों की आय बढ़ाने और लोगों को बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने में सहायक बने हैं।

बता दें, बीते सीजन में जिले में 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी की दर से 39 किसानों से 41.88 मीट्रिक टन प्राकृतिक गेहूं की सरकारी खरीद की गई। इस कार्यक्रम में तय एमएमसपी और साथ ही 200 रुपये प्रति क्विंटल परिवहन भत्ता जोड़कर कुल 25.83 लाख रुपये की राशि सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई और प्रतीकात्मक रूप से किसानों को डमी चेक प्रदान किए गए।

विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी विषैली हो रही है, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखती है। लागत लगभग शून्य होने के कारण किसानों की आय में स्वाभाविक वृद्धि होती है।

उन्होंने प्राकृतिक खेती में आगे आने वाले किसानों की सराहना करते हुए कहा कि यह अभी बस एक शुरुआत है और इसे बड़े पैमाने पर आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि किसान रसायन-मुक्त खेती अपनाएं, सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

कार्यक्रम में आत्मा परियोजना निदेशक वीरेंद्र बग्गा ने बताया कि ऊना जिले में 2,092 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती हो रही है और 16,858 किसान प्रशिक्षण लेकर इस पद्धति से जुड़े हैं। बीते सीजन में जिले में खरीदी गई 41.88 मीट्रिक टन गेहूं में अंब ब्लॉक से 4.91 मीट्रिक टन, बंगाणा से 2.35, गगरेट से 16, हरोली से 11.15 और ऊना से 7.24 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को देसी गाय साहीवाल, गिर, थारपरकर, सिंधी, पहाड़न की खरीद पर अधिकतम 25,000 रुपये या 50 प्रतिशत सब्सिडी, 5,000 रुपये परिवहन भत्ता, प्लास्टिक ड्रम पर 75 प्रतिशत अनुदान, साइकिल हल पर 1,500 रुपये या 50 प्रतिशत, और गाय के लिए पक्का फर्श निर्माण पर अधिकतम 8,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।

कार्यक्रम में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. के.के. भारद्वाज ने किसानों को फलों की खेती के विभिन्न विकल्पों पर जानकारी दी। इस मौके पर कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष मदन मोहन सैनी, डीआरडीए परियोजना अधिकारी के.एल. वर्मा, आत्मा परियोजना की उपनिदेशक शामली गुप्ता तथा तनुजा कपूर, कुटलैहड़ के युवा कांग्रेस पदाधिकारी गोल्डी, हर्ष, रिशु और दीपक सहित लाभार्थी किसान व विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
 

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