आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ना उनके स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ : हाईकोर्ट 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में नर्सों की आउटसोर्स पर बड़े पैमाने पर भर्तियों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार को 5 जनवरी तक हलफनामा दायर करने का आदेश

Jan 2, 2026 - 11:56
Jan 2, 2026 - 11:57
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आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ना उनके स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ : हाईकोर्ट 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    02-01-2026

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में नर्सों की आउटसोर्स पर बड़े पैमाने पर भर्तियों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार को 5 जनवरी तक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। 

अदालत ने कहा कि भर्ती नियमों में नियमित और अनुबंध का प्रावधान होने के बावजूद आउटसोर्स पर पद क्यों भरे जा रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि 31 जुलाई 2024 तक स्टाफ नर्सों के 750 पद खाली थे, लेकिन राज्य सरकार ने केवल 28 पद ही नियमित आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब भर्ती नियमों में नियमित या अनुबंध आधार पर भर्ती का प्रावधान है, तो स्वीकृत पदों के विरुद्ध आउटसोर्स का सहारा क्यों लिया जा रहा है। 

कोर्ट ने टिप्पणी की है कि यह प्रथा शोषण पर आधारित है और लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मियों को नियमित की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। अदालत ने इसे मरीजों के अधिकारों का हनन और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन भी माना। 

अदालत ने कहा कि बिना विभागीय नियंत्रण वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ना उनके स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। सरकारी नियंत्रण न होने के कारण इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

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