एचपीयू में कार्यरत सहायक प्रोफेसर का स्कूल स्तर का प्रमाणपत्र फर्जी,एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू
उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं और अब ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश में सामने आया है। राज्य की प्रमुख शिक्षण संस्था हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर का स्कूल स्तर का प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 16-02-2026
उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं और अब ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश में सामने आया है। राज्य की प्रमुख शिक्षण संस्था हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर का स्कूल स्तर का प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लोक प्रशासन विभाग में एक सहायक प्रोफेसर विजय सिंह को 28 सितंबर 2024 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था और उन्होंने 30 सितंबर 2024 को कार्यभार ग्रहण किया। नियुक्ति के समय उन्होंने अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय में जमा कराए थे, जिनमें वरिष्ठ माध्यमिक (स्कूल) परीक्षा से संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल था। नियुक्ति की शर्तों के अनुसार इन प्रमाणपत्रों का संबंधित बोर्ड से सत्यापन किया जाना था।
दस्तावेजों के सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय ने संबंधित प्रमाणपत्र राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान को भेजे। सत्यापन के दौरान पता चला कि उम्मीदवार द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र में दर्शाए गए अंकों और बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज अंकों में अंतर है। कुछ विषयों में अंक और परिणाम की स्थिति रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी, जिससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता संदिग्ध पाई गई।
बाद में बोर्ड की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में भी स्पष्ट किया गया कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र और वास्तविक रिकॉर्ड में असंगति है। विश्वविद्यालय ने इस संबंध में संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने रजिस्ट्रार के माध्यम से पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस थाना बालूगंज में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान सिंह सागर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान फर्जी या गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने की आशंका है, इसलिए मामले की जांच आवश्यक है।
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