कांग्रेस के लिए हमारा संविधान केवल सत्ता को साधने का एक उपकरण मात्र रहा : सिद्धार्थन

भाजपा जिला शिमला द्वारा 75वे संविधान दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कानून एवं विधि विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय संधू मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता रहे। उनके साथ प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन, प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा, प्रदेश सचिव डॉ. संजय ठाकुर, प्रदेश कार्यालय सचिव प्रमोद ठाकुर सहित मोर्चा एवं मंडलों के अध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे

Nov 26, 2024 - 18:57
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कांग्रेस के लिए हमारा संविधान केवल सत्ता को साधने का एक उपकरण मात्र रहा : सिद्धार्थन
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  26-11-2024
भाजपा जिला शिमला द्वारा 75वे संविधान दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कानून एवं विधि विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय संधू मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता रहे। उनके साथ प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन, प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा, प्रदेश सचिव डॉ. संजय ठाकुर, प्रदेश कार्यालय सचिव प्रमोद ठाकुर सहित मोर्चा एवं मंडलों के अध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। संधू ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा भारतीय संविधान भारत के लोकतंत्र का मूल आधार है। आज भारत का आधुनिक लोकतंत्र 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूर्ण कर प्रगति पथ पर अग्रसर है। इस 75 वर्षीय यात्रा के केंद्र में हमारा संविधान प्रतिष्ठित रहा है। ध्यातव्य है कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान की रचना में भारतीय जीवन मूल्यों की मान्यताओं, आधुनिक शासन और भविष्य की आशाओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति को केंद्र में रखा था। इन लक्ष्यों की सिद्धि करने वाले दस्तावेज के रूप में हमारा संविधान 26 नवंबर, 1949 को देश की जनता को समर्पित किया गया था। 
इस दृष्टि से 26 नवंबर भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज होना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्यवश लंबे समय तक ऐसा नहीं हो सका। स्वतंत्रता के पश्चात दशकों तक केंद्रीय सत्ता में रही कांग्रेस के विचार में 26 नवंबर का ऐतिहासिक महत्व कभी नहीं आया। वास्तव में, कांग्रेस नेतृत्व सत्ता पर प्रभुत्व एवं नियंत्रण स्थापित रखने को ही लोकतंत्र का प्रमुख उद्देश्य मानता था। वे स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी तो मनाते रहे, पर 'संविधान दिवस' जैसे महत्वपूर्ण अवसर, जब देश ने संविधान को अंगीकार किया था, को मात्र न्यायपालिका तक सीमित कर दिया। संविधान केवल न्यायिक या वैधानिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि वह भारत की जनता की आशाओं एवं आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस अर्थ में यह देश के जन-जन के मन का दस्तावेज है। उस अवसर पर प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि 'संविधान दिवस' की उपेक्षा तो एक विषय है। अन्यथा कांग्रेस का रवैया हर प्रकार से संविधान विरोधी ही रहा है। संविधान को कमजोर करने वाले अनेक प्रयास कांग्रेस समय-समय पर करती आई है। 
कांग्रेस द्वारा अपने शासनकाल में इस पर संशोधन लाने का प्रयास किया गया कि सरकार संविधान में क्या-क्या परिवर्तन कर सकती है? उल्लेखनीय होगा कि इसी विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में केशवानंद भारती मामले की ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने माना था कि 'संशोधन करने की शक्ति में संविधान की मूल संरचना या रूपरेखा को बदलने की शक्ति शामिल नहीं है, जिससे कि इसका मूल ही बदल जाए।' तब जस्टिस सीकरी ने सुनवाई में कहा था कि, 'संविधान में संशोधन' शब्द संसद को मौलिक अधिकारों को निरस्त करने, छीनने या संविधान की मौलिक विशेषताओं को पूरी तरह से बदलने में सक्षम नहीं बनाता है, जिससे इसकी पहचान ही नष्ट हो जाए। बल्कि, इन सीमाओं के भीतर ही संसद हर अनुच्छेद में संशोधन कर सकती है।' स्पष्ट है कि न्यायालय द्वारा संशोधन को लेकर मर्यादा निर्धारित की गई है। अन्यथा अतीत की कांग्रेस सरकारों की मंशा तो संविधान में मनमाने परिवर्तन की ही थी। प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन ने कहा कि आपातकाल के काले दौर में कांग्रेस द्वारा ऐसा किया भी गया, जब इंदिरा गांधी सरकार ने संविधान की मूल प्रस्तावना ही बदल डाली। 
स्पष्ट है कि कांग्रेस के लिए हमारा संविधान केवल सत्ता को साधने का एक उपकरण मात्र रहा है, संविधान के प्रति सम्मान की भावना कांग्रेस के चरित्र में नहीं है। वर्ष 2014 में सत्तारूढ़ होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार संविधान के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की संकल्पना को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। भारतीय संविधान और लोकतंत्र को सुदृढ़ करने की मंशा से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। सत्ता में आने के अगले ही वर्ष यानी 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने दशकों से उपेक्षित 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत कर दी। 
यह दर्शाता है कि उनमें भारतीय संविधान के प्रति कितनी गहरी सम्मान भावना है। केंद्र और राज्य के बीच संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करते हुए एक बेहतर तालमेल और संवाद से युक्त व्यवस्था का निर्माण कर संविधान में निहित संघीय ढांचे को मजबूती देने का काम मोदी सरकार ने किया है। इतना ही नहीं, संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के सम्मान में उनसे संबंधित स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने का कार्य भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किया गया है। यह सभी कार्य भारतीय संविधान के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान और प्रतिबद्धता को ही प्रकट करते हैं।

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