हिमाचल प्रदेश की शिक्षा और जनसरोकारों के प्रश्नों पर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी विद्यार्थी परिषद : नैंसी अटल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी बैठक, ऊना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के वर्तमान शैक्षणिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा करते हुए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में शिक्षा, युवाओं, कानून व्यवस्था, नशामुक्ति, रोजगार, महिला सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े विषयों पर सरकार की उदासीनता अत्यंत चिंताजनक है
यंगवार्ता न्यूज - शिमला 28 जुलाई, 2026 :
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी बैठक, ऊना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के वर्तमान शैक्षणिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा करते हुए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में शिक्षा, युवाओं, कानून व्यवस्था, नशामुक्ति, रोजगार, महिला सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े विषयों पर सरकार की उदासीनता अत्यंत चिंताजनक है। यदि इन विषयों पर शीघ्र एवं प्रभावी निर्णय नहीं लिए गए तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से प्रदेशव्यापी जनआंदोलन करेगी।
कार्यकारिणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और शांतिपूर्ण सामाजिक वातावरण के लिए पूरे देश में जाना जाता रहा है, किंतु वर्तमान समय में प्रदेश अनेक गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाया है। प्रदेश में विद्यालयों के बंद एवं विलय, महाविद्यालयों के डी-नोटिफिकेशन, शिक्षकों के हजारों रिक्त पद, विश्वविद्यालयों में नियमित कुलपतियों एवं शिक्षकों का अभाव, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा विद्यार्थियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ ने शिक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
कार्यकारिणी ने कहा कि छात्र संघ चुनावों पर लंबे समय से लगी रोक विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। विद्यार्थी परिषद प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल करने तथा विद्यार्थियों पर थोपी गई अन्यायपूर्ण फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग करती है। परिषद का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है तथा सरकार का दायित्व है कि वह शिक्षा को आर्थिक बोझ बनने से रोके।
बैठक में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। हाल के समय में हत्या, महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध, नशे के फैलते नेटवर्क, साइबर अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, भू-माफिया एवं वन-माफिया की सक्रियता ने प्रदेश की शांत छवि को प्रभावित किया है। परिषद ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। साथ ही प्रदेश के शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए कृषि, बागवानी, पर्यटन, स्टार्टअप, कौशल विकास एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित किए जाने चाहिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विद्यार्थी परिषद प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाकर विद्यार्थियों और समाज की आवाज़ को सरकार तक पहुँचाएगी। आंदोलन के अंतर्गत प्रदेश, जिला एवं विभाग स्तर पर प्रेस वार्ताओं का आयोजन किया जाएगा। महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के माध्यम से कुलपतियों तथा उपायुक्तों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में धरना-प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान, छात्र रैलियाँ तथा सांकेतिक भूख हड़ताल का आयोजन किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में जिला मुख्यालयों पर व्यापक धरना-प्रदर्शन कर विद्यार्थियों की न्यायोचित मांगों को सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से रखा जाएगा।
कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल छात्र संघ चुनाव और फीस वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियाँ, शिक्षण संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, महिला सुरक्षा, नशामुक्त हिमाचल तथा सुशासन जैसे व्यापक जनहित के विषयों को भी केंद्र में रखेगा।
अंत में प्रदेश कार्यकारिणी ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि विद्यार्थियों एवं युवाओं से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता और समयबद्धता के साथ निर्णय लिए जाएँ। परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने छात्रहित और जनहित के प्रश्नों की निरंतर उपेक्षा की, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से व्यापक जनआंदोलन को और अधिक तेज़ करेगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
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