शिमला जिला में देवठण पर्व पर ठूंड मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

स्थान ठूंड में देवोत्थान, जिसे स्थानीय भाषा में देवठण कहते हैं, के पर्व पर हजारों लोगों ने देव जुन्गा के दर्शन करके आर्शिवाद प्राप्त किया। देवठण पर ठूंड में बीती रात देवता जुुन्गा का जागरण  ( घैना ) लगाया गया। इस दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए करियाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध लोकगायक पंकज ठाकुर  सहित अन्य कलाकरों ने पूरी रात लोगों का एक पहाड़ी नाटी प्रस्तुत खूब नचाया। साधु का स्वांग में व्यंग्य और एक दूसरे पर मजाकिया प्रहार करते हुए लोगों को हंसा कर लोटपोट कर दिया। इस मौके पर भंडारा का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

Nov 3, 2025 - 19:36
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शिमला जिला में देवठण पर्व पर ठूंड मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  03-11-2025
स्थान ठूंड में देवोत्थान, जिसे स्थानीय भाषा में देवठण कहते हैं, के पर्व पर हजारों लोगों ने देव जुन्गा के दर्शन करके आर्शिवाद प्राप्त किया। देवठण पर ठूंड में बीती रात देवता जुुन्गा का जागरण  ( घैना ) लगाया गया। इस दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए करियाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध लोकगायक पंकज ठाकुर  सहित अन्य कलाकरों ने पूरी रात लोगों का एक पहाड़ी नाटी प्रस्तुत खूब नचाया। साधु का स्वांग में व्यंग्य और एक दूसरे पर मजाकिया प्रहार करते हुए लोगों को हंसा कर लोटपोट कर दिया। इस मौके पर भंडारा का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। 
देवोत्थान पर्व बारे जानकारी देते हुए देव जुन्गा के पुजारी नंदलाल शर्मा ने कहा कि ठूंड को रियासत काल से जुन्गा देवता के 22 टीका का स्थान माना जाता है। जहां पर हर वर्ष देवशयनी और देवोत्थान के अवसर पर देव जुन्गा का आर्शिवाद पाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु आते हैं। देव जुन्गा की मान्यता समूचे क्योंथल क्षेत्र में पाई जाती हैं और देवठण पर सभी देवता ठूंड के 22 टीका स्थान पर हाजिरी भरते हैं। उन्होंने बताया कि देवठन और दसूणी के अवसर पर पूरे क्षेत्र के देवता देवचंद , पंजाल के कुंथली देवता , धार के मनूणी देवता , भनोग के जुन्गा देवता सहित 22 देवता एकत्रित होते है। जहां पर लोग मनौती पूर्ण होने पर देवता को भेंट अर्पित करते हैं।
 देवठण पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में चावल के दाने दिए जाते हैं जिसे लोग अपने घर में सहेज कर रखते हैं। जुन्गा देवता के कलैणे  मनोहर सिंह ठाकुर ने बताया कि जुन्गा देवता का इतिहास क्योंथल रियासत के राजा परिवार से जुड़ा है। बताया कि जुन्गा देवता की मान्यता समूची तत्कालीन क्योंथल रियासत में पाई जाती है। इस मौके पर देव जुन्गा समिति के प्रधान प्रेम ठाकुर , सचिव प्रीतम ठाकुर , दीपक रोहाल , सुरेश ठाकुर बलोग , राजीव ठाकुर , प्रदीप ब्रागटा , सुरेश वर्मा , देवेन्द्र नंबरदार , कृष्ण रोहाल, चेतराम शर्मा सहित समिति के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।  

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