यंगवार्ता न्यूज शिमला 17 जून, 2026 :
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उसके उपक्रमों में आउटसोर्स पर कर्मियों की भर्ती करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिन पदों पर आउटसोर्स आधार पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या चल रही है, उनके नियुक्ति पत्र भी जारी नहीं होंगे। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए बिना किसी नियमों के आउटसोर्स पर की जा रही भर्तियों को भेदभावपूर्ण, मनमाना और बेरोजगारों का शोषण करार दिया है।
खंडपीठ ने सरकार को भर्ती नियमों का पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार और उससे जुड़े किसी भी उपक्रम में भविष्य में कोई भी नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को अनदेखा करके नहीं की जाएगी। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को सांविधानिक मानदंडों के विपरीत माना है। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पहले लोगों को आउटसोर्स आधार पर रखा जाता है और उसके बाद उन्हें रोगी कल्याण समिति में समाहित कर लिया जाता है। अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने अज्ञात उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आउटसोर्स भर्तियों के रूप में एक गुप्त मार्ग खोल दिया गया है, जो पारदर्शी चयन के लिए घातक है।
अदालत में सरकार की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया है कि हिमाचल में विभिन्न विभागों में 26 हजार से ज्यादा लोगों को आउटसोर्स के जरिये भर्ती किया गया है। अदालत में दायर पिछले हलफनामे और ताजा हलफनामा में नियुक्तियों के आंकड़ों में बहुत अंतर पाया है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले पिछले तीन वर्षों में आउटसोर्स पर कितनी नियुक्तियों की गई है, इसका आंकड़ा हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी। अदालत को राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि उसके पास यह पूरी जानकारी नहीं है कि प्रदेश सरकार सहित अन्य उपक्रमों में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। सुनवाई के दौरान वित्त सचिव देवेश सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम सुधा देवी कोर्ट में पेश नहीं हुईं। पिछले सुनवाई में अदालत ने उन्हें कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि स्वास्थ्य सचिव विदेश दौरे पर हैं। इस पर कोर्ट ने कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाया।